गर्मी से पहले बिजली की जर्जर लाइनें, ट्रांसफार्मरों की स्थिति सुधारने समेत अन्य कार्यों के लिए भले ही अनुरक्षण माह चल रहा हो लेकिन इसका प्रभावी असर दिखाई नहीं दे रहा है। अभी भी महानगर के अधिकांश स्थानों पर लगे ट्रांसफार्मर पेड़-पौधे से ढंके हैं। केबल और बिजली के खंभे लताओं से लिपटे हुए हैं। इसके बावजूद, जिम्मेदार इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जिले में 16 फरवरी से दक्षिणांचल विद्युत निगम लिमिटेड की ओर से अनुरक्षण माह चलाया जा रहा है ताकि ग्रीष्म ऋतु आने से पहले बिजली की आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके। इसके तहत, जर्जर केबल या पोल को सुधारा जाना है, लेकिन शहरी क्षेत्र में यह काम धीमी गति से चल रहा है। मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने कई स्थानों पर अनुरक्षण काम की हकीकत देखी।
स्थान 1
बीकेडी चौराहे के पास 11 केवी का ट्रांसफार्मर लगा हुआ है। इसके पास पेड़ खड़ा है। टहनियां केबल को छू रही हैं। खंबे पर बेल चढ़ी हुई है। कई नंगे तार हैं, जो हादसे का सबब बन सकते हैं।
स्थान 2
आंतिया ताल के पास 11 केवी का ट्रांसफार्मर पेड़ से ढंका हुआ है। केबल भी पेड़ की टहनियों और पत्तों से ढंकी हुई है। बारिश के समय गीले पत्तों से कभी भी करंट फैल सकता है।
स्थान 3
आशिक चौराहे के पास लगा ट्रांसफार्मर भी पेड़ की टहनियों से ढंका हुआ है। यहां अगर कोई जानवर घुस जाए तो हादसा हो सकता है। हरे भरे पेड़-पौधों की टहनियों के टकराने से करंट फैल सकता है।
अनुरक्षण माह में होने वाले काम
गर्मी से पहले अनुरक्षण कार्य कराया जाता है। इसका उद्देश्य गर्मी और बारिश से पहले बिजली की लाइनें, ट्रांसफार्मरों की स्थिति को ठीक करना है। ट्रांसफार्मर या बिजली लाइनों से पेड़ों की टहनियां टकराने लगती हैं। उन्हें हटाने का काम किया जाता है। यही नहीं, जो नंगे तार हों, उन्हें बदलना व अन्य रखरखाव के कार्य किए जाते हैं। खराब हुए लग व बुसिंग को बदलने का भी काम होता है ताकि गर्मी में लाइन पर लोड पड़ने पर इनमें फॉल्ट न हो। लाइन लॉस भी कम से कम हो।
इनका यह है कहना
अनुरक्षण माह के तहत 11 केवी की लाइन और ट्रांसफार्मरों को दुरुस्त कराया जा रहा है। जहां-जहां खराबी है या पेड़-पौधे टकरा रहे हैं, उन्हें भी छंटवाया जा रहा है।
- एसपी सोनकर, एक्सईएन (11 केवी तकनीकी)