कोहरे के मद्देनजर रेल प्रशासन ने झांसी लखनऊ पैसेंजर का संचालन सात दिसंबर से 13 फरवरी तक निरस्त कर दिया है। इससे लखनऊ की तरफ छोटे स्टेशनों के लिए सफर यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है।
झांसी से लखनऊ जाने वाली पैसेंजर रात 2.50 बजे झांसी से रवाना होती है। इस ट्रेन का लखनऊ पहुंचने का समय दोपहर 11.55 बजे है। रेल प्रशासन ने कोहरे की संभावना को देखते हुए इस पैसेंजर ट्रेन का संचालन तीन दिसंबर से 13 फरवरी के बीच कानपुर से लखनऊ के बीच आंशिक निरस्त कर दिया था। मगर, बिगड़ते मौसम के कारण इस ट्रेन का संचालन सात दिसंबर से 13 फरवरी तक पूरी तरह रोक दिया गया है।
इस ट्रेन का झांसी और लखनऊ के बीच मुस्तरा, गढ़मऊ, पारीछा, चिरगांव, नंदखास, मोंठ, एरच रोड, पिरौना, एट, भुआ, उरई, आटा, कालपी, चौराह, पुखरायां, मलासा, लालपुर, तिलौची, पामा, रसूलपुर गोगुमऊ, बिनौर, भीमसेन, गोविंदपुरी, कानपुर सेंट्रल, मगरवाहा, उन्नाव, सोनिक, अजगेन, कुसुंबी, जैतीपुर, हरौनी, पिपरसंड, अमौसी और मानकनगर स्टेशन पर ठहराव है।
सर्दी के कारण ट्रेनों की लेटलतीफी बढ़ना शुरू हो गई है। स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ बढ़ा दी है। ठंड में लोगों को रात खुले में बितानी पड़ रही है। कुछ यात्री परिसर में आग जलाकर समय काटते रहे।
झांसी रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख स्टेशनों में शुमार है। यात्रियों को चारों दिशाओं की ओर यहां से ट्रेनें सुगमता से मिल जाती हैं। प्रतिदिन झांसी से बीना, भोपाल और इटारसी की ओर 67, ग्वालियर, आगरा व दिल्ली की ओर 67, कानपुर की तरफ 28 व इलाहाबाद की तरफ 12 गाड़ियां उपलब्ध हैं। आम दिनों में ट्रेनों का संचालन सामान्य बना रहने से भीड़ स्टेशन पर दिखाई नहीं पड़ती है। सर्दी बढ़ने से यात्रियों के सफर मुसीबत भरा बनना शुरू हो गया है। रात में ठंड से बचने के लिए रिटायरिंग रूम, वेटिंग रूम, पैसेंजर हॉल, बुकिंग हॉल यात्रियों से भर जाते हैं। इन स्थानों की क्षमता कम होने से सैकड़ों यात्रियों को प्लेटफार्म व रेलवे परिसर में खुले में बैठकर गुजारना पड़ रहा है।
बुधवार को वाराणसी से ग्वालियर जाने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे, अमृतसर से बिलासपुर जाने वाली छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस साढ़े छह घंटे, गोरखपुर सिकंदराबाद एक्सप्रेस साढ़े पांच घंटे, चंबल एक्सप्रेस तीन घंटे, लोकमान्य तिलक गोरखपुर एक्सप्रेस साढ़े छह घंटे के अलावा अधिकांश गाड़ियां एक से डेढ़ घंटे देरी से आईं। झांसी से प्रतिदिन करीब 22 हजार यात्री ट्रेनों में सवार होते हैं।