झांसी व ललितपुर जिले के डेढ़ सौ लोगों ने साठ करोड़ रुपये के काले धन की घोषणा की है। अब इन लोगों को घोषित काले धन में से पैंतालीस फीसदी रकम टैक्स के रूप में जमा करनी होगी। यह रकम वह तीन किस्तों में जमा कर सकते हैँ। शेष पचपन फीसदी रकम उनकी व्हाइट मनी हो जाएगी।
केंद्र सरकार ने काला धन निकलवाने के लिए अघोषित आय घोषणा शुरू की थी, जिसकी मियाद तीस सितंबर को पूरी हो चुकी है। झांसी-ललितपुर परिक्षेत्र के पैंसठ हजार आयकर दाताओं में डेढ़ सौ ने साठ करोड़ की अपनी अघोषित संपत्ति की घोषणा की है। इनमें सवा सौ ऐसे करदाता हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति 25 लाख से एक करोड़ दिखाई हैं। बाकी ने एक करोड़ से अधिक की अघोषित आय को स्वीकार किया है। तय समय में उक्त सभी ने ऑनलाइन फार्म भरकर अघोषित संपत्ति को स्वीकार किया था।
अघोषित आय घोषणा करने वाले लोगों को अब तीन किस्तों में 45 प्रतिशत टैक्स जमा करना होगा। 45 में 25 प्रतिशत की राशि की पहली किस्त 30 नवंबर 2016, 25 फीसदी राशि की दूसरी किस्त 31 मार्च 2017 तक और बाकी राशि की तीसरी किस्त 30 सितंबर 2017 तक जमा करनी होगी।
इंसेट
केस चलेगा व जुर्माना होगा
भविष्य में किसी व्यक्ति के पास अघोषित आय पकड़ी गई तो उस पर तगड़ा जुर्माना ठोका जाएगा और कानूनी कार्रवाई भी होगी।
साथ में
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परिक्षेत्र में 1100 लखपति आयकर दाता
झांसी- ललितपुर परिक्षेत्र में हर साल दस लाख से अधिक का फायदा दिखाने वाले आयकर दाताओं की संख्या बढ़ती जा रही है। इस वित्तीय सत्र में 110 से अधिक ऐसे नए आयकर दाता सामने आए, जिन्होंने अपने व्यापार में दस लाख से अधिक का मुनाफा दिखाया है। झांसी-ललितपुर सर्किल में ऐसे आयकर दाताओं की संख्या 1100 से ज्यादा हो गई है।
झांसी-ललितपुर परिक्षेत्र में वर्ष 2014-15 तक आयकर दाताओं की संख्या 60,500 थी, इसमें 15,500 ललितपुर के आयकर दाता थे। इस वर्ष झांसी जनपद में 5,000 व ललितपुर में 500 नये आयकर दाता सामने आए हैं। परिक्षेत्र से कुल 150 करोड़ रुपये का रिटर्न दाखिल हुआ। अब तक परिक्षेत्र में एक हजार के करीब ऐसे आयकर दाता थे, जो अपने व्यापार में दस लाख रुपये से अधिक का फायदा दिखाते थे। इस आंकड़े में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। वर्ष 2015-16 में एक सौ दस आयकर दाता नये उभर कर सामने आए हैं, जिन्होंने इस वर्ष दस लाख रुपये से अधिक का मुनाफा रिटर्न में दिखाया है। इस बदलाव का कारण लोन आदि में हैसियत को बनाए रखने से जोड़कर देखा जा रहा है। अपने व्यापार में पूंजी बढ़ाने के लिए व्यापारी, ठेकेदार व उद्योगपतियों को अपनी आय का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करना पड़ रहा है।