सुबह गांव की गलियों में चहलकदमी, घर में बना बुंदेली खाना, खेत-खलिहान की सैर और ग्रामीण परिवार के साथ बैठकर स्थानीय जीवन को समझना... लाडपुरा खास आने वाले पर्यटकों के लिए यह किसी होटल में ठहरने से अलग अनुभव है। ओरछा से करीब आठ किलोमीटर दूर बसे इस गांव ने अपने घरों को ही पर्यटन का हिस्सा बनाकर बुंदेली संस्कृति से पर्यटकों को जोड़ दिया है।
विज्ञापन
खेती-किसानी, पारंपरिक व्यंजन, लोक संस्कृति और गांव का प्राकृतिक परिवेश यहां आने वाले पर्यटकों के अनुभव का हिस्सा बनते हैं। इसी विशिष्टता के चलते लाडपुरा खास को वर्ष 2024 में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज’ प्रतियोगिता की जिम्मेदार पर्यटन श्रेणी में सम्मान मिला था।
लाड़पुरा खास गांव में बना होम-स्टे।
- फोटो : अमर उजाला
घर बने ठिकाना, गांव बना पर्यटन स्थल
लाडपुरा खास में ग्रामीण होम-स्टे की पहल वर्ष 2019 में शुरू हुई थी। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने स्थानीय परिवारों को योजना से जोड़कर ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की शुरुआत की। सरकारी सहायता से ग्रामीणों ने अपने घरों में पर्यटकों के ठहरने के लिए कमरे और जरूरी सुविधाएं विकसित कीं। गांव में फिलहाल करीब 20 होम-स्टे संचालित हो रहे हैं। योजना का विस्तार आसपास के राधापुर और बगान गांवों में भी किया जा रहा है। यानी पर्यटन का केंद्र केवल कोई स्मारक या होटल नहीं, बल्कि पूरा गांव बन रहा है।
आम ग्रामीण जीवन भी बन रही पर्यटन की कहानी
लाडपुरा खास के होम-स्टे की खासियत सिर्फ पर्यटकों को रहने के लिए कमरा उपलब्ध कराना नहीं है। पर्यटक जिस परिवार के घर में ठहरते हैं, उसी के साथ गांव की दिनचर्या को करीब से देखते-समझते हैं। स्थानीय खानपान का स्वाद लेते हैं और ग्रामीण जीवन की गतिविधियों से रूबरू होते हैं। इससे बुंदेलखंड की पहचान केवल ओरछा के महल, मंदिर और ऐतिहासिक इमारतों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यहां का आम ग्रामीण जीवन भी पर्यटन की कहानी बन जाता है।
घर की आमदनी का नया जरिया
होम-स्टे ने स्थानीय परिवारों के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय का अवसर भी तैयार किया है। पर्यटक कमरा किराये पर लेते हैं तो उसका लाभ सीधे ग्रामीण परिवार को मिलता है। साथ ही भोजन और स्थानीय गतिविधियों से भी आमदनी का रास्ता बनता है। संदीप पाठक बताते हैं कि वह वर्ष 2019 में होम-स्टे योजना से जुड़े थे। उनके मुताबिक पर्यटकों का अच्छा रिस्पांस मिलता है और पूरे साल लोग आते रहते हैं। अब वह कमरों की संख्या बढ़ाने की योजना पर काम कर रहे हैं। वहीं, घासीराम पांडेय ने दो साल पहले अपने घर में होम-स्टे शुरू किया। उनके मुताबिक पर्यटन विभाग की योजना के तहत सब्सिडी मिली और फिलहाल उनके पास पर्यटकों के लिए दो कमरे हैं। ऑनलाइन बुकिंग के जरिये पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
बगैर नया पर्यटन स्थल बनाए बढ़ा सकते हैं गांव की पहचान
लाडपुरा खास का मॉडल यह बताता है कि ग्रामीण पर्यटन के लिए हर जगह नए बड़े होटल या पर्यटन स्थल विकसित करना जरूरी नहीं है। गांव की अपनी संस्कृति, खानपान, परंपरा, खेती और प्राकृतिक परिवेश को ही व्यवस्थित तरीके से पर्यटन उत्पाद बनाया जा सकता है। मध्य प्रदेश के निवाड़ी से सटे यूपी के झांसी, ललितपुर जिले में भी कई ऐसे गांव हैं, जहां लोक संस्कृति, पारंपरिक खानपान, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। इन गांवों के परिवारों को होम-स्टे से जोड़कर स्थानीय स्तर पर पर्यटन और रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
एमपी में सब्सिडी, झांसी में भी बढ़ रहा दायरा
लाडपुरा खास में होम-स्टे को बढ़ावा देने में मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को अहम माना जा रहा है। विभागीय जानकारी के मुताबिक योजना में होम-स्टे से जुड़ने वाले लोगों को एक कमरा तैयार करने के लिए दो लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है।
झांसी मंडल में भी होम-स्टे को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है। मंडलीय पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा के मुताबिक योजना के प्रति ग्रामीणों में रुचि बढ़ी है। प्रधानों को लाडपुरा खास का भ्रमण भी कराया गया था। उनके अनुसार रानपुर और फुटेरा में होम-स्टे की अच्छी संभावनाएं हैं। झांसी में योजना के तहत 20-25 आवेदन आए हैं और उन्हें मंजूरी दी जा चुकी है।