झांसी। दुघर्टना में घायल व्यक्ति को समय पर इलाज मुहैया करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा पांच साल पहले गुड सेमेरिटन योजना (नेक आदमी) की शुरूआत की गई थी। लेकिन पांच साल गुजरने के बाद भी आज तक एक भी व्यक्ति को नेक आदमी का दर्जा प्राप्त नहीं हो सका है। योजना में घायल हो अस्पताल पहुंचाने पर दो हजार रुपये भी मिलते है।
दुघर्टना में घायल लोगों की जान बचाने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में गुड सेमेरिटन (नेक आदमी) योजना को शुरू किया गया था। ताकि समय पर इलाज मिलने पर लोगों की जान बचाई जा सके। योजना के तहत घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को ‘नेक आदमी’ का दर्जा दिया जाता है। साथ ही उसे दो हजार रुपये भी दिए जाते है। लेकिन जानकारी के अभाव में पिछले पांच साल के दौरान अब तक एक भी आदमी ने यह सम्मान हासिल नहीं कर पाया। जबकि शहर में रोजाना दस से पंद्रह छोटे व बडे़ सड़क हादसे होते है जिनको बचाने के लोग भी आगे आकर अस्पताल तक पहुंचाते हैं। लेकिन लोग कानूनी कार्रवाई के डर से घायलों को सिर्फ अस्पताल तक पहुंचाकर ही गायब हो जाते हैं।
इस संबंध में अस्पताल के सीएमएस डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि गुड सेमेरिटन की लोगों को जानकारी नहीं होने के कारण लोग दुघर्टना में घायल मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराकर गायब हो जाते हैं। जिसके चलते नेक आदमी का प्रमाण पत्र व धनराशि देना काफी मुश्किल हो जाता है।
ऐसे मिलता हैं नेक आदमी का दर्जा
सुप्रीमकोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत सरकार द्वारा वर्ष 2016 में गुड सेमेरिटन (नेक आदमी) योजना की शुरूआत की गई थी। योजना के तहत सड़क दुघर्टना में घायलों को अस्पताल तक लाने वाले मददगार को नेक आदमी का दर्जा दिया गया है। नियमानुसार दुघर्टना में घायल को अस्पताल तक लाने वाले व्यक्ति से पुलिस किसी भी तरह की पूछताछ नहीं कर सकती है और न ही नाम व पते को दर्ज करेगी।