नगर निगम उपसभापति पद का चुनाव पांच माह से भाजपा में छिड़े आंतरिक कलह की वजह से अटका हुआ है। भाजपा में किसी एक नाम पर सहमति न बन पाने से यह संभव नहीं हो पा रहा है। वहीं, चुनाव न होने से नगर निगम का पुनरीक्षित बजट दो माह पिछड़ गया है। प्रावधानों के मुताबिक, सितंबर में बजट पेश होना चाहिए लेकिन उपसभापति पद खाली होने से बैठक नहीं हो पा रही है। इस वजह से बजट भी पारित नहीं हो पा रहा है। पार्षद जल्द चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।
कार्यकारिणी की मंजूरी से नगर निगम के सामान्य कामकाज होते हैं लेकिन हैरानी की बात यह कि उपसभापति पद पिछले पांच माह से खाली पड़ा है। इस वजह से कार्यकारिणी बैठक ही नहीं हो पा रही है। कार्यकारिणी की पिछली बैठक जून में हुई थी। 9 जून को कार्यकारिणी चुनाव हुआ। नियमों के मुताबिक, सदस्यों के चुनाव के साथ उपसभापति का चुनाव कराया जाना चाहिए लेकिन पांच माह बीत जाने के बाद भी चुनाव नहीं कराए जा सके।
असली पेच यहां फंसा
विपक्षी कार्यकारिणी सदस्य महेश गौतम, विकास खत्री के साथ-साथ भाजपा पार्षद भी चुनाव कराने की मांग कर चुके हैं। वहीं, निगम सूत्रों का कहना है कि असली पेच फंसा भाजपा के भीतर छिड़े घमासान की वजह से फंसा है। तीन अलग-अलग खेमों में विभाजित होने से उपसभापति पद के लिए किसी एक पार्षद का नाम तय नहीं हो पा रहा। इस वजह से चुनाव अटका है। कार्यकारिणी में सर्वाधिक दस सदस्य भाजपा के हैं। इस नाते भाजपा का उपसभापति बनना तय है। महापौर बिहारी लाल आर्य का कहना है कि जल्द ही चुनाव की तिथि घोषित की जाएगी।
नेता सदन का भी चुनाव कराना चाह रहे पार्षद
भाजपा पार्षद नेता सदन का भी चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। भाजपा पार्षदों का कहना है कि कार्यकाल के ढाई साल बीत जाने के बाद अभी तक नेता सदन का चुनाव नहीं कराया गया। इस वजह से सदन के भीतर पार्षद एक मत नहीं हो पाते हैं। निवर्तमान उपसभापति प्रियंका साहू, कार्यकारिणी सदस्य मुकेश सोनी समेत अन्य भाजपा पार्षदों का कहना है कि उपसभापति के साथ ही नेता सदन का भी चुनाव कराया जाए।