आईटीआई अंडर ब्रिज में पेटिंग पर विज्ञापन।
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शहर को खूबसूरत बनाने के लिए नगर निगम ने दीवारों पर लाखों रुपये खर्च कर टू-डी और थ्री-डी पेंटिंग करा दीं। रंगों से सजी दीवारें कुछ दिन तक शहर की खूबसूरती का हिस्सा बनीं, फिर अवैध प्रचार करने वालों की नजर पड़ गई। किसी ने पोस्टर चिपका दिए तो किसी ने पेंट से ही अपना प्रचार लिख डाला। अब सवाल यह है कि 30 लाख रुपये की रंगत बचाने की जिम्मेदारी किसकी है?
महानगर में प्रचार-प्रसार के लिए नगर निगम ने निर्धारित स्थानों पर विज्ञापन पट लगाने का ठेका दे रखा है। इसके एवज में विज्ञापन फर्में निगम को टैक्स भी देती हैं और इससे निकाय को राजस्व मिलता है। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर शहर की दीवारों, बिजली के खंभों और सार्वजनिक स्थलों को प्रचार का जरिया बनाया जा रहा है। आईटीआई अंडरब्रिज के नीचे, सीपरी बाजार ओवरब्रिज के नीचे समेत कई स्थानों पर दीवारें पोस्टर और पेंट से रंगी नजर आती हैं। यानी जिस दीवार को निगम ने शहर की तस्वीर बदलने के लिए संवारा, उसी को प्रचार करने वालों ने फिर अपनी पसंद का ‘कैनवास’ बना लिया।
निगम की खूबसूरती पर प्रचार का कब्जा
शहर में अवैध होर्डिंग, बल्लियों पर लगाए गए विज्ञापन और अवैध कियोस्क पहले से ही निगम के लिए चुनौती बने हुए हैं। अब सुंदर बनाई गई दीवारें भी इससे अछूती नहीं हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां नुकसान केवल शहर की सुंदरता का नहीं, बल्कि निगम के खर्च किए गए लाखों रुपये का भी है। स्वच्छ सर्वेक्षण से पहले हर साल नगर निगम महानगर में टू-डी और थ्री-डी वॉल पेंटिंग कराता है। इस साल भी इन कार्यों पर 30 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। इसके बाद भी इन दीवारों की निगरानी और संरक्षण के लिए कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती।