‘‘अतः अपीलस्य (प्रत्यावेदनस्य) ग्राहयता स्तरे एवं अवर न्यायालयेन 20-10-2021 इति दिनांके निगर्तम् आदेशं निरस्तीकृत्य प्रकरणमिदम् एतेन निर्देशन सह प्रतिपे्रषितम् क्रियते यद् अपीलकतार् 29-01-2020 इति दिनांके प्रस्तुते रिस्टोरेशन प्राथर्ना-पत्र विषये उभयोःपक्षयोः पुनः श्रवणाम् अवसरं विधाय गुणदोषयोश्च विचायर् एकमासाभ्यन्तरम् निस्तारणं करणीयम् वाद प्रतिवाद पत्रावली च कायार्लये सुरक्षिता करणीया।’’
दूूसरे मामले में भी ऐसे ही लिखा आदेश
इसी प्रकार मंडलायुक्त के न्यायालय में शस्त्र लाईसेंस से सम्बन्धित वाद संख्या-1266/ 2021 रहीश प्रसाद यादव बनाम राज्य सरकार उ0प्र0 अंतगर्त धारा-18 भारतीय शस्त्र अधिनियम, 1959 दिनांक 18-12-2021 में दर्ज हुआ। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद उभयपक्षों को साक्ष्य व सुनवाई का समुचित अवसर देते हुए संस्कृत भाषा में दो पन्नों का निर्णय पारित किया गया। संस्कृत भाषा में पारित निर्णय में यह लिखा गया है।
‘‘एतासु परिस्थितिषु अवर न्यायालयेन 06-9-2021 दिनांकेः निगर्ते आदेशाविषये प्रतिक्षेपाय (हस्तक्षेपाय) औचित्य भवित्येव। अतः अस्य प्रतिवेदनस्य (अपीलस्य) विलम्बतः प्रस्तुतिविषये ‘‘विलम्बं सम्मषर्यन्’’ अपीलस्य (प्रतिवेदनस्य) ग्राह्यतास्थितौः एव स्वीकृत्य झांसी स्थावर न्यायालयेन/जनपद मजिसट्रेट महोदयेन 06-9-2021 दिनांकः निर्गत: आदेशः निरस्तीक्रियते। अपीलकतुर्ः रिवाल्वर शस्त्र सम्बन्धित मनुज्ञापत्रम्-‘‘7698’’ सम्प्रवतिर्तं क्रियते। यदि आगामिनि समये कदापि शस्त्रानुज्ञाश्रयिजनस्य शस्त्रस्य दुरूपयोगे शस्त्रानुज्ञानबन्धविषये वा समुल्लंघमस्य परिस्थितिः समायादि तदा अवर न्यायालयात्, पुलिस विभागात् मजिस्ट्रेट महोदयात् सारगभिर्तां तथ्ययुक्तामाख्याम् (रिपोटर्) च सम्प्राप्य गुणावगुणविषये क्रियान्वयम् विधातं सक्षमः स्वतन्त्राश्च भविष्यन्ति। शस़्त्रस्य अनुज्ञानुबन्धस्य निरन्तरम् निरीक्षणं-परीक्षणम् च भवेदिति निदेर्शयन् अस्य आदेशस्य प्रतिकृतिः (प्रतिलिपिः) अवरन्यायालयाय प्रत्यावतर्नीया। वादस्य आवश्यकी कायर्वाही अपील पत्रावली (प्रतिवेदन पत्रावली) अभिलेखागारे सुरक्षिता भवितत्या/काणीया।
मंडल में संस्कृत में आदेश लिखने का पहला मामला
झांसी मंडल का इतिहास बहुत पुराना है इसलिए हिंदी के अलावा ब्रिटिश काल में और उसके बाद इस समय तक अंग्रेजी भाषा में तो निर्णय पारित होने के साक्ष्य मिलते हैं परन्तु संस्कृत भाषा में निणर्य पारित होने का यह पहला मामला है। कमिश्नरी, झांसी के अभिलेखागार में कायर्रत अभिलेखपाल दिलीप कुमार ने पुराने रिकॉर्ड्स की छानबीन करके बताया कि ब्रिटिश काल से झांसी कमिश्नरी सन् 1911 से चल रही है। अभिलेखीय आधार पर सिर्फ उपरोक्त निर्णय ही संस्कृत भाषा में पारित किए गए हैं।