बस स्टैंड पर बंद पड़ा नवनिर्मित पिंक टॉयलेट।
झांसी। महानगर को स्मार्ट बनाने के सपने को अफसरों की लापरवाही के चलते बड़ा झटका लगा है। स्मार्ट शहरों की रैंकिंग में झांसी फिर पिछड़ गई है। शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जारी की गई 100 शहरोें की रैंकिंग में झांसी 83वें स्थान पर है। जबकि दो महीने पहले जारी की गई रैंकिंग में झांसी 60वेें स्थान पर थी। पिछड़ने का कारण महानगर में स्मार्ट सिटी के तहत चयनित कामों को समय पर पूरा न करना बड़ी वजह है।
शहरी विकास मंत्रालय स्मार्ट सिटी के तहत चयनित 100 शहरों की रैंकिंग जारी करता है। इसमें हर शहर को प्रोजेक्ट पूरे करने, बजट का प्रयोग करने के आधार पर अंक दिए जाते हैं। जनवरी 2020 में जारी की गई रैंकिंग में झांसी को 181.74 अंक मिले थे। इसके बाद शुक्रवार को मंत्रालय ने रिवाइज रैंकिंग जारी की, जिसमें झांसी 23 स्थान खिसक कर 83वें पायदान पर पहुंच गई। रैंकिंग में झांसी को 19.08 अंक मिले हैं। बताया जा रहा है कि स्मार्ट सिटी के तहत नगर निगम अब तक महज दो काम ही करा सका है। जबकि तमाम काम अधूरे पड़े हैं। इसके चलते लगातार रैकिंग में महानगर पिछड़ता जा रहा है।
खाते में पड़ा है करोड़ों का बजट
स्मार्ट सिटी की राह में अफसरों की अनदेखी बड़ी वजह है। नगर निगम के पास स्मार्ट सिटी के तहत 200 करोड़ रुपये का बजट है, लेकिन काम कराने में अफसर रुचि नहीं ले रहे हैं। बीते दिनों मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा ने भी स्मार्ट सिटी की धीमी गति को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। इसे लेकर उन्होंने पीएमसी को नोटिस भी दिया था। कामों की रफ्तार अगर नहीं बढ़ सकी, तो स्मार्ट सिटी का सपना अधूरा रह जाएगा।
ये काम अब तक अधूरे
- स्मार्ट सड़क का निर्माण
- सोलर प्लांट
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग
-ट्रैफि क की मॉनीटरिंग
- प्रदूषण, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट
-अरबन हाट रिटेल स्टोर
- प्रदर्शनी सेंटर
- मोनो रेल, रोप वे
- स्मार्ट वेंडिंग जोन समेत तमाम प्रोजेक्ट पर अब तक अमल नहीं किया जा सका है।
- पिंक टॉयलेट का निर्माण होने के बाद भी इन्हें शुरू नहीं किया जा सका है।