जल्द ही संवरेगी किले की तलहटी
झांसी। किले की तलहटी के उजाड़ हिस्से को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की तैयारी है। योजना के तहत सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। अब झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) की योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी है। जेडीए बोर्ड योजना को पहले ही हरी झंडी दिखा चुका है।
वैसे तो किले के इर्दगिर्द का अधिकांश हिस्सा संवर चुका है। रानी लक्ष्मीबाई पार्क, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पार्क व डा. वृंदावन लाल वर्मा पार्क लोगों को खूब आकर्षित करते हैं। इसके अलावा क्राफ्ट मेला ग्राउंड में अरबन हाट बनकर तैयार हो चुकी है, दो माह में यहां हस्तशिल्प का कारोबार शुरू हो जाएगा। इसके अलावा यहां बने दीनदयाल सभागार के जीर्णोद्धार का काम भी जारी है। जबकि, राजकीय संग्रहालय भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। बावजूद, अब भी किले की तलहटी का एक बड़ा हिस्सा उजाड़ पड़ा हुआ है। मैथिलीशरण गुप्त पार्क से सटे इस हिस्से को देखकर पर्यटकों को निराशा होती है।
इस कमी को पूरा करने के लिए पिछले दिनों इसे संवारने की योजना तैयार की गई थी। इसका प्रस्ताव झांसी विकास प्राधिकरण के बोर्ड के समक्ष भी रखा गया था, जिसे बोर्ड ने हरी झंडी दिखा दी थी। साथ ही योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था, जिसमें जेडीए, नगर निगम और पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया था। योजना के तहत क्या-क्या काम किया जाना है, इसके लिए चयनित इलाके के सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। इसके तहत इस पूरे हिस्से को पार्क का रूप दिया जाएगा। चारों ओर चारदीवारी का निर्माण होगा। जगह-जगह बैंच लगाई जाएंगी और खाली पड़ी जमीन पर बगीचे बनाए जाएंगे। कई स्थानों पर फव्वारे भी तैयार किए जाएंगे। सैर सपाटे के लिए वॉकिंग ट्रैक का भी निर्माण किया जाएगा। जगह-जगह लाइटें लगाई जाएंगी। सुबह शाम यहां म्यूजिक भी सुनने को मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि उक्त इलाका पहले से ही हराभरा तो है, परंतु यहां जंगली पेड़ और झाड़ियां लगी हुई हैं। इससे यहां कोई आता जाता नहीं है। छुट्टा जानवर यहां डेरा जमाए रहते हैं और गंदगी की भी भरमार है।
किले की तलहटी को विकसित करने की योजना के तहत पूरे इलाके का सर्वे करा लिया गया है। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद विकास का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा।
- सर्वेश कुमार दीक्षित, उपाध्यक्ष - झांसी विकास प्राधिकरण