दीपावली पर उल्लुओं की बलि देने की मान्यता प्रचलित हैं। इसे लेकर वन विभाग अलर्ट है और सात टीम अपने-अपने रेंज में निगरानी कर रही है। जनपद में उल्लुओं की दो प्रजातियां बार्न और स्कॉप्स पाई जाती हैं।
दीपावली पर उल्लुओं की बलि देने की मान्यता प्रचलित हैं। इसे लेकर वन विभाग अलर्ट है और सात टीम अपने-अपने रेंज में निगरानी कर रही है। जनपद में उल्लुओं की दो प्रजातियां बार्न और स्कॉप्स पाई जाती हैं। इस प्रजाति के उल्लू रात के वक्त पेड़ों और खंडहरों में नजर आते हैं। धार्मिक मान्यता है कि उल्लू लक्ष्मीजी का वाहन है। बलि देने की मान्यता के चलते इनकी तस्करी का खतरा बढ़ जाता है।
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रेंजर विमलेश ने बताया कि उल्लू की बलि की मान्यता के चलते सातों रेंजों में उल्लू की पहरेदारी बढ़ा दी गई है। सात रेंजर के अलावा वन समिति को भी अलर्ट मोड पर रखने के साथ लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है। जनपद में तस्करी के मामला फिलहाल कई वर्षों से सामने नहीं आया, फिर भी वन विभाग सतर्क है। बता दे की दिवाली से पहले ही कुछ लोग उल्लू पकड़ कर उनकी खरीद-फरोख्त शुरू कर देते हैं।