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झांसी अग्निकांड: फरवरी में देखी गई थी फायर सेफ्टी की व्यवस्था, जून में हुआ ट्रायल; अफसोस फिर भी वक्त पर सब फेल

Sat, 16 Nov 2024 05:04 PM IST
श्याम जी. पीटीआई, झांसी

सार

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार को उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिसमें यह कहा गया कि अस्पताल में रखे आग बुझाने के उपकरण एक्सपायर हो गए। उन्होंने कहा कि सभी अग्निशमन उपकरण पूरी तरह से ठीक हैं।
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झांसी अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झांसी मेडिकल कॉलेज में आग लगने के बाद बताया गया कि अस्पताल में आग बुझाने के उपकरण एक्सपायर हो गए, इसलिए उनका उपयोग नहीं किया जा सका। इसके बाद डिप्टी सीएम ने इन रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि फरवरी में मेडिकल कॉलेज में अग्नि सुरक्षा ऑडिट किया गया था और जून में एक मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी। अब अगर कुछ महीने पहले ही अस्पताल में फायर सेफ्टी का ट्रायल किया गया, तब तो सब सही बताया गया... फिर घटना के वक्त सबकुछ कैसे फैल हो गया?

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महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक है। इस अस्पताल के  नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में शुक्रवार रात में बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। आग में जलकर 10 बच्चों की मौत हो गई। घटना में अन्य 16 बच्चे घायल होकर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस वार्ड में आग लगी, उसमें कुल 55 बच्चे थे। 

सभी अग्निशमन उपकरण पूरी तरह से ठीक
घटना के बाद के बाद बात अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और अस्पताल में रखे आग बुझाने वाले उपकरण पर पहुंच गई। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अस्पताल में आग बुझाने के उपकरण एक्सपायर हो गए थे और अलार्म खराब थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ने कहा, 'योगी आदित्यनाथ सरकार बच्चों और उनके परिवारों के साथ खड़ी है। हमारे कर्मचारियों, डॉक्टरों और बचाव दल ने बच्चों को बचाने के लिए बहादुरी से काम किया है। मेडिकल कॉलेज में सभी अग्निशमन उपकरण पूरी तरह से ठीक थे। यहां फरवरी में अग्नि सुरक्षा ऑडिट किया गया था और जून में एक मॉक ड्रिल भी आयोजित की गई थी।

मेडिकल कॉलेज में कुल 146 अग्निशामक यंत्र लगे हुए 
वहीं, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर ने भी इन आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा, 'मेडिकल कॉलेज में कुल 146 अग्निशामक यंत्र लगे हुए हैं। हादसे के वक्त एनआईसीयू वार्ड के अग्निशामक यंत्र का भी इस्तेमाल किया गया था। इन सभी उपकरणों का समय-समय पर ऑडिट भी किया जाता है। इस दौरान जो कमियां सामने आती हैं उन्हें हटा दिया जाता है।'

हादसे की जांच की जा रही-  प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर
सेंगर ने कहा, 'इन सभी का ऑडिट फरवरी में किया गया था, जबकि जून में मॉक ड्रिल की गई थी। मेडिकल कॉलेज में आग बुझाने के उपकरण खराब होने का दावा पूरी तरह से निराधार है। शॉर्ट सर्किट के कारण वार्ड में आग लगी थी। हादसे की जांच की जा रही है।' इस बीच, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुधा सिंह ने बताया कि 16 घायल बच्चों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी डॉक्टर पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के साथ उनके लिए उपलब्ध हैं। 
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रात करीब एक बजे तक चलता रहा बचाव अभियान
सुधा सिंह ने बताया कि ऐसी जानकारी थी कि एनआईसीयू में आग लगने के बाद कुछ माता-पिता अपने बच्चों को घर ले गए। उन्होंने कहा कि आग लगने के समय एनआईसीयू में मौजूद बच्चों की सही संख्या और उनकी वर्तमान स्थिति का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। सिंह ने कहा, 'मेडिकल कॉलेज ने बताया है कि घटना के समय 52 से 54 बच्चे भर्ती थे और उनमें से 10 की मौत हो गई, जबकि 16 का इलाज चल रहा है... अन्य का सत्यापन जारी है।' उन्होंने बताया कि एनआईसीयू में बचाव अभियान रात करीब एक बजे पूरा हुआ।
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