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Jhansi: मेडिकल कॉलेज में फिर खुलेगा नेत्र बैंक, शासन से गठित टीम ने किया निरीक्षण

Wed, 10 Dec 2025 12:09 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

नेत्र बैंक खोलने का प्रयास वर्ष 2012 से चल रहा है। शासन ने हाल में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत नेत्र बैंक पंजीकरण प्रमाण-पत्र के लिए टीम गठित की थी। टीम ने निरीक्षण किया और कहा कि कॉलेज में नेत्र बैंक खोलने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।
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मेडिकल कॉलेज, झांसी - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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मेडिकल कॉलेज में अब फिर से नेत्र बैंक खुलना तय है। मंगलवार को शासन की टीम ने निरीक्षण किया और कहा कि कॉलेज में नेत्र बैंक खोलने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। शासन को इसकी रिपोर्ट शाम तक भेज दी जाएगी।
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नेत्र बैंक खोलने का प्रयास वर्ष 2012 से चल रहा है। शासन ने हाल में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत नेत्र बैंक पंजीकरण प्रमाण-पत्र के लिए टीम गठित की थी। टीम के सदस्य डॉ. राजनाथ सिंह कुशवाहा और डॉ. अंजू सिंह ने 29 वर्ष पहले बंद किए गए नेत्र बैंक को देखा। इसके बाद 500 बेड अस्पताल में प्रस्तावित नेत्र बैंक और कॉर्निया प्रत्यारोपण ऑपरेशन थियेटर को देखा। वहां मौजूद उपकरणों की जानकारी ली।

मेडिकल कॉलेज में नेत्र बैंक खोलने के सभी संसाधन हैं। पर्याप्त डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ भी है। शासन को मेल से इसकी रिपोर्ट भेज दी जाएगी। इस रिपोर्ट पर डीजी ऑफिस 15 दिन से एक माह में अनुमति दे सकता है। - डॉ. राजनाथ सिंह कुशवाहा, शासन से आई टीम के सदस्य
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शासन से मिलेंगे ये अत्याधुनिक उपकरण
मेडिकल कॉलेज ने शासन से 1.50 करोड़ रुपये के अत्याधुनिक उपकरण जैसे स्पेक्युलर माइक्रोस्कोप, ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप, वातानुकूलित एंबुलेंस मांगी है, जो जल्द मिलने की उम्मीद है।

ओपीडी की दूसरी मंजिल पर था नेत्र बैंक
मेडिकल कॉलेज के ओपीडी की दूसरी मंजिल पर नेत्र बैंक का शुभारंभ छह अप्रैल 1988 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री लोकपति त्रिपाठी ने किया था। इसे बैंक अंधता निवारण संघ ने स्थापित कराया था। संघ के संस्थापक भानु सहाय ने बताया कि उस समय नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जीडी गुप्ता थे। डॉ. गुप्ता दान में मिली आंखें अपने घर ले गए, जहां निवाड़ी की महिला व एक बालक को कॉर्निया प्रत्यारोपित किया। बच्चे ने आंख खुजा ली, इससे रोशनी नहीं आई। इसके बाद एक व्यक्ति की और आंख दान में मिली, जिनको प्रत्यारोपित किया गया। रुचि न लेने की वजह से बैंक 1994 में बंद हो गया।

200 ने कराया पंजीकरण, 100 से ज्यादा मरे
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि उनके पास करीब 200 लोग नेत्रदान के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। चूंकि बैंक नहीं था, इसलिए किसी की भी आंख नहीं ली। पंजीकृत लोगों में से 100 से ज्यादा मर चुके हैं।
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निरीक्षण करने आई टीम जानकारी देती हुई...
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