सीपरी बाजार स्थित रघुनाथ मंदिर के पुजारी बुजुर्ग कैलाश नारायण पाठक को साइबर अपराधियों ने करीब नौ घंटे घर पर डिजिटल अरेस्ट रखा। शातिर दिल्ली पुलिस की फर्जी प्रोफाइल के सहारे उनको धमकाते रहे। उनकी धमकी से सहमे पुजारी की तबीयत बिगड़ गई। देर रात बेटा घर पहुंचा तो पिता की हालत देख घबरा उठा। मोबाइल लेकर बेटा उनके साथ पुलिस के पास पहुंचा। तब जाकर उनको राहत मिल सकी।
सहमे बुजुर्ग ने नहीं काटी वीडियो कॉल, 9 घंटे बाद घर आए बेटे ने काटा
पुजारी कैलाश नारायण (75) ने बताया कुछ दिन पहले दोपहर करीब 11 बजे उनके मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को खुफिया इकाई से जुड़ा बताते हुए धमकाने के अंदाज में कहा कि पहलगाम हमले के लिए देश के कुछ लोगों ने पैसे भेजे हैं। इसमें तुम्हारे नाम का भी इनपुट मिला है। उसके पास उनके खिलाफ सुबूत हैं। कैलाश नारायण को व्हाट्स एप पर बैंक के डेबिट कार्ड की तस्वीर और विजिलेंस का फर्जी नोटिस भेजा। नोटिस में सरकारी मुहर के साथ अशोक की लाट का चित्र अंकित था। नोटिस और जालसाज की बातों के अंदाज से कैलाश डर गए। साइबर अपराधी ने कॉफ्रेंस कॉल के जरिए दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर दूसरे शातिर को भी जोड़ लिया। इसके बाद दोनों मिलकर कैलाश नारायण को धमकाने लगे। कॉल न काटने की धमकी देते हुए कहा उनकी निगरानी रखी जा रही है। गड़बड़ी मिलने पर दिल्ली पुलिस झांसी आकर उनको घर से घसीटकर ले जाएगी। घटना 30 जुलाई की बताई गई है।
बेइज्जती की आशंका से बुजुर्ग कैलाश नारायण बुरी तरह सहम उठे। उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया। सहमे कैलाश नारायण ने वीडियो कॉल नहीं काटी। रात करीब आठ बजे बेटे के लौटने पर कैलाश ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। किसी तरह बेटे ने कमरा खुलवाकर उनसे पूछा। कैलाश ने डरते-डरते उसे यह बात बताई। बेटा कॉल काटकर उनको सीधे साइबर थाना लेकर पहुंचा। इसके बाद वह लोग एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह के पास पहुंचे। उस दौरान दोबारा से कॉल आ गई। एसपी सिटी के जब अपराधियों को धमकाया तब जाकर पुजारी का पीछा छूटा। एसपी सिटी के मुताबिक साइबर अपराधियों के इस गैंग को तलाश किया जा रहा है।