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Jhansi: बजट के अभाव में अटकी ''ड्रोन दीदियों'' की उड़ान, एक साल पहले लखनऊ में दिया गया था प्रशिक्षण

Mon, 13 Jul 2026 10:41 AM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी

सार

महिला किसानों ने एक वर्ष पहले लखनऊ में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण तो पूरा कर लिया लेकिन ड्रोन उपलब्ध न होने से वे अब तक स्वरोजगार शुरू नहीं कर सकी हैं।
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ड्रोन दीदी योजना - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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महिलाओं को कृषि क्षेत्र में तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ड्रोन दीदी योजना झांसी में बजट के अभाव में रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। बड़ागांव ब्लॉक की तीन चयनित महिला किसानों ने एक वर्ष पहले लखनऊ में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण तो पूरा कर लिया लेकिन ड्रोन उपलब्ध न होने से वे अब तक स्वरोजगार शुरू नहीं कर सकी हैं। प्रशिक्षण के बाद भी संसाधन न मिलने से उनके आत्मनिर्भर बनने के सपनों को इंतजार करना पड़ रहा है।
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योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ना है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से चयनित महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद उन्हें कृषि कार्यों के लिए ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे खेतों में उर्वरक और कीटनाशक का छिड़काव जैसी सेवाएं देकर आय अर्जित कर सकें। पिछले वर्ष बड़ागांव ब्लॉक की तीन महिलाओं का चयन कर उन्हें लखनऊ में प्रशिक्षण दिलाया गया था। प्रशिक्षण पूरा हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है लेकिन बजट जारी न होने के कारण उन्हें अब तक ड्रोन नहीं मिल सके हैं। इसके चलते वे प्रशिक्षण का व्यावहारिक उपयोग नहीं कर पा रही हैं।

एक ड्रोन की कीमत करीब 10 लाख रुपये
एनआरएलएम के माध्यम से प्रशिक्षण पूरा करने वाली महिलाओं को करीब 10 लाख रुपये लागत का कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है। इसी ड्रोन के माध्यम से वे किसानों को छिड़काव सेवाएं देकर नियमित आय अर्जित कर सकती हैं। संवाद
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सफल उदाहरण भी मौजूद
योजना के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। करीब दो वर्ष पहले बड़ागांव क्षेत्र के गड़मऊ गांव की रानी देवी और हेमवती को हैदराबाद में प्रशिक्षण दिलाया गया था। प्रशिक्षण के बाद दोनों को ड्रोन उपलब्ध कराए गए। वे वर्तमान में किसानों के खेतों में ड्रोन से छिड़काव कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि नई चयनित महिलाओं को भी समय पर ड्रोन मिल जाएं, तो वे भी इसी तरह स्वरोजगार स्थापित कर सकेंगी।

यह है ड्रोन दीदी योजना
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कृषि ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रशिक्षण के बाद कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है।
ड्रोन से उर्वरक, कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव कम समय में किया जा सकता है।
इससे किसानों की लागत और समय दोनों की बचत होती है, जबकि प्रशिक्षित महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलता है।


बजट मिलते ही ड्रोन दीदी योजना में चयनित महिला किसानों को ड्रोन उपलब्ध करा दिए जाएंगे, ताकि वे कृषि सेवाएं शुरू कर सकें। - सुनील कुमार सिंह, प्रभारी, एनआरएलएम, झांसी
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