झांसी मेले में दिव्यांगों को कारोबार करने के लिए मंच दिया गया है। इसमें वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं और उनके इस प्रदर्शन से हर कोई हतप्रभ है। एक दिव्यांग अगरबत्ती बनाने का काम करता है और उसे बाजार में बेचता है।
बीकेडी मैदान में बुधवार को दिव्यांगजन मेला आयोजित किया गया। इसमें दिव्यांगों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रशासन ने मंच प्रदान किया है। इस मेले में कोई नेत्रहीन बुंदेली गायक है तो मूक बधिर पेंटर होने के साथ-साथ हर्बल साबुन बना रहा है।
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इस मेले में दिव्यांगों को कारोबार करने के लिए मंच दिया गया है। इसमें वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं और उनके इस प्रदर्शन से हर कोई हतप्रभ है। एक दिव्यांग अगरबत्ती बनाने का काम करता है और उसे बाजार में बेचता है। इससे होने वाली आय से अपना खर्च वहन करता है। इसके अलावा, दिव्यांग एक युवती जिसका अंगूठा विकृत है, वह अपनी कला का प्रदर्शन करने में पीछे नहीं है। कोरे कागज पर उसकी ओर से उकेरी गईं रंगीन कलाकृतियां आपको एक बार निहारने के लिए मजबूर कर देंगी। वहीं, मूकबधिर एक छात्रा कई प्रकार के रंग-बिरंगे हर्बल साबुन बनाने के साथ कई प्रकार के बैग बनाने में माहिर है।
प्रमोद सेन ने बताया कि ठीक ढंग से दिखाई नहीं देता है। लगता था कुछ कर नहीं पाऊंगा लेकिन हौसला नहीं हारा और अगरबत्ती बनाने का हुनर सीखने के बाद आज मैं आत्मनिर्भर हूं।
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नेहा सक्सेना का कहना है कि हाथ का एक अंगूठा ठीक नहीं है लेकिन मेरे अंदर पेंटिंग को लेकर दिलचस्पी थी। हौसला नहीं हारा और किसी प्रकार से पेंसिल और रंगों के माध्यम से रंगीन कलाकृति बनाईं।
संजना ने बताया कि मूक बधिर हूं पर हौसला कम नहीं है। इशारों से हर बात समझ लेती हूं। आर्मी की तरफ से दिव्यांगों के लिए संचालित स्कूल में शिक्षा के साथ आत्मनिर्भरता के गुर सिखाए जाते हैं। वहीं सीख रही हूं। - संजना अग्रवाल