मकर संक्रांति पर्व पर जलाशयों में स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। यही वजह है कि इस पर्व पर झांसी से 15 किलोमीटर दूर दतिया जिले के उनाव में स्थित बालाजी सूर्य मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
श्रद्धालुओं ने बृहस्पतिवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाते हुए घरों एवं पवित्र नदियों में स्नान किया। मंदिरों में आराध्य भगवान के दर्शन किए। खिचड़ी एवं तिल के लड्डू दान किए। समाजसेवी एवं धार्मिक संगठनों ने जगह - जगह खिचड़ी वितरित की।
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बालाजी सूर्य मंदिर
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सूर्य ने मकर राशि में बुधवार को प्रवेश किया लेकिन मकर संक्रांति का पर्व जिले भर में बृहस्पतिवार को मनाया गया। श्रद्धालुओं ने उनाव बालाजी स्थित पहूंज नदी में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पण किया।
सूर्य भगवान को अर्घ्य देती महिला
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मकर संक्रांति पर्व पर जलाशयों में स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। यही वजह है कि इस पर्व पर झांसी से 15 किलोमीटर दूर दतिया जिले के उनाव में स्थित बालाजी सूर्य मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
मंदिर के बाहर पहूज नदी पर श्रद्धालु
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परंपरानुसार लोग नदी में स्नान कर गीले बदन भगवान सूर्य को जल अर्पित करने मंदिर जाते हैं। हालांकि, यह क्रम यहां वर्ष भर प्रत्येक रविवार को जारी रहता है, लेकिन मकर संक्रांति पर आसपास के जिलों से भी लोग यहां पहुंचते हैं। आवागमन की व्यवस्था दुरुस्त रखने और सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर मार्ग पर जगह-जगह पुलिस की तैनाती की गई है। वाहनों को मंदिर मार्ग से पहले ही रोकने की व्यवस्था की गई है, ताकि जाम की स्थिति न बने।
स्नान करते लोग
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उनाव में मंदिर की स्थापना सोलहवीं शताब्दी में हुई थी। तब एक चबूतरे पर सूर्य यंत्र स्थापित किया गया था। बाद में झांसी के राजा नारायण राव (नारूशंकर) ने इसे मंदिर का रूप दिया।
उनाव बालाजी की पहूज नदी
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दतिया के राजा नरेश रावराजा ने सन् 1736 से 1762 के बीच मंदिर को भव्य रूप दिया। दतिया स्टेट गजेटियर के अनुसार 1854 में सिंधिया के मंत्री मामा साहब जाधव ने मंदिर का और विस्तार कराया। मंदिर के गर्भ गृह के ठीक सामने से पहूज (पुष्पावती) नदी निकली हुई है।