झांसी। झांसी की जन्मतिथि में गलती के बाद नगर निगम ने शासन को भेजे प्रस्ताव को निरस्त कर दिया है। अब नए सिरे से झांसी के सृजन की तिथि तय की जाएगी। इस बार जनता से जन्मतिथि को लेकर सुझाव और प्रमाण मांगे जाएंगे। इसके बाद महापौर की अध्यक्षता में गठित होने वाली नई कमेटी आखिरी निर्णय लेगी। उधर, झांसी के इतिहास को लेकर 20 साल पुराना बताने को लेकर सोमवार को भी विरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी रहा।
शासन के निर्देश पर नगर निगम ने झांसी के सृजन की तिथि सात फरवरी 2002 तय कर रिपोर्ट भेजी थी। इसे लोग निगम की लापरवाही बताकर तिथि को दोबारा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। लगातार हो रहे विरोध को देखते हुए नगर आयुक्त ने शासन को भेजे गए प्रस्ताव को निरस्त कर दिया है। साथ ही नए सिरे से महापौर की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने की बात कही। वहीं कमेटी से पहले झांसी की जनता सही जन्मतिथि को लेकर सुझाव देगी। सुझाव के साथ ही लोगों को जन्मतिथि को लेकर आधिकारिक प्रमाण भी देना होगा। इस पर कमेटी निर्णय लेकर नई तिथि घोषित होगी। नगर आयुक्त पुलकित गर्ग ने बताया कि प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया है। लोगों और कमेटी से चर्चा के बाद नई तिथि घोषित होगी।
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किले की नींव रखने और रानी के राज्याभिषेक की तिथि की तलाश
नगर निगम नई तिथि को लेकर असमंजस में है। झांसी सृजन की तिथि के लिए किले की नींव रखने और रानी का राज्याभिषेक होने की तिथि तलाशी जा रही है। निगम पुराने गजेटियर और पुरातत्वविदों के जरिए इसके प्रमाण खोज रहा है।
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कांग्रेसियों ने किया घेराव
झांसी की जन्मतिथि गलत घोषित करने को लेकर कांग्रेस नेताओं ने पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य के नेतृत्व में नगर आयुक्त पुलकित गर्ग का घेराव कर इतिहासकारों से चर्चा के बाद नई तिथि घोषित करने की मांग की। इस मौके पर पूर्व पार्षद मुकेश अग्रवाल, इदरीश खान, नीता अग्रवाल, अखलाक मकरानी, अखिलेश, अमीरचंद आर्य, अनिल रिछारिया, इंदिरा रायकवार, अफसर खान मौजूद रहे। वहीं राष्ट्रभक्त संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष अंचल अड़जरिया के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने नगर आयुक्त से मुलाकात कर नई तिथि तय करने की मांग की।