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मां-बेटे में जागा वैराग्य, नौ साल बाद मिलेगी जैनेश्वरी दीक्षा

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झांसी। महानगर का एक परिवार वैराग्य मार्ग पर बढ़ गया है। नौ साल पहले छोटे पुत्र ने घर छोड़कर त्याग का मार्ग अपना लिया था अब मां और बड़ा बेटा भी इस पथ पर बढ़ने जा रहे हैं। अबकी 14 दिसंबर को टीकमगढ़ में आचार्य विनिश्चय सागर महाराज मां-बेटे को जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान करेंगे। दोनों के वैराग्य मार्ग पर बढ़ने और दीक्षा की श्रावक-श्राविकाएं अनुमोदना कर रहे हैं।
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झांसी महानगर के गुदरी निवासी राजेंद्र कुमार जैन का परिवार दीक्षा लेकर जैन धर्म प्रभावना और त्याग की ओर बढ़ गया है। करीब 20 साल पहले राजेंद्र कुमार जैन का निधन हो गया था। इसके बाद पुत्र सोहित जैन और विकास जैन ने गृहस्थी का जिम्मा संभाला। दोनों भाइयों और मां सुधा जैन ने बहन राखी जैन और सपना जैन का विवाह किया। इसके बाद वर्ष 2013 में झांसी में आचार्य विनिश्चय सागर महाराज का वर्षायोग हुआ। उसी समय दोनों भाई और मां आचार्यश्री की चर्या से प्रभावित हुए और आचार्यश्री के समक्ष जैनेश्वरी दीक्षा के लिए निवेदन किया।
इसके बाद छोटा पुत्र विकास जैन घर छोड़कर आचार्य संघ में शामिल हो गया। वर्ष 2015 में आचार्यश्री ने विकास जैन को दीक्षा प्रदान की। अब वे संघ में श्रमण मुनिश्री प्रज्ञान सागर जी नाम से सुशोभित होकर धर्म प्रभावना कर रहे हैं। अब मां सुधा जैन और बड़े पुत्र सोहित जैन का जिनदीक्षा का निवेदन स्वीकार हुआ है। दोनों को 14 दिसंबर को जैनेश्वरी दीक्षा आचार्यश्री प्रदान करेंगे। इसके बाद वे दोनों भी संघ में शामिल हो जाएंगे।
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एक महीने पहले मिले संकेत
झांसी। मां सुधा जैन और उनके पुत्र सोहित जैन को आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ने एक महीने पहले ही दीक्षा के संकेत दिए। ग्रेजुएशन तक शिक्षा प्राप्त कर चुके सोहित जैन बताते हैं कि साल 2013 में उन्होंने आचार्यश्री से पांच साल का ब्रह्मचर्य व्रत लिया। इसके बाद एटा में आचार्य विराग सागर महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत और जून में दो प्रतिमा (नियम) के व्रत लिए। मां सुधा जैन ने भी जनवरी में दो प्रतिमा (नियम) के व्रत लिए। अब दीक्षा को लेकर मां और बेटे उत्साहित हैं। सुधा जैन की मां सूरज देवी जैन भी 10 साल पहले आचार्य विराग सागर महाराज से दीक्षा लेकर क्षुल्लिका विभाषाश्री माताजी बनकर धर्म प्रभावना कर रही हैं।
आज निकलेगी बिनौली यात्रा
झांसी जैन समाज में यह पहला मौका है कि मां-बेटे एक साथ त्याग मार्ग पर बढ़ने जा रहे हैं। इसे लेकर मंगलवार को उनकी बिनौली यात्रा निकाली जाएगी। साथ ही दो और तीन नवंबर को हल्दी और मेहंदी की रस्म होगी। इसके साथ ही मंगलवार को ही पांच नवंबर से शुरू हो रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान को लेकर भरत चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा निकाली जाएगी।
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