झांसी। झांसी समेत बुंदेलखंड के मरीजों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। अब महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में पीजीआई के कार्डियोलॉजिस्ट आकर एंजियोप्लास्टी करेंगे। इसके लिए मेडिकल कॉलेज और पीजीआई के अधिकारियों के बीच सहमति हो गई है। ऐसे में बुंदेलखंड के मरीजों का सिर्फ स्टंट का पैसा देना होगा। बाकी, सब नि:शुल्क होगा। साथ ही उन्हें दूरदराज के शहरों की भागदौड़ भी नहीं करनी पड़ेगी।
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बने सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में कार्डियोलॉजी विभाग की अलग यूनिट बनी है। इसमें कैथ लैब की भी स्थापना की गई है। इसी लैब में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की सुविधा है। एंजियोग्राफी रक्त वाहिनी नलिकाओं धमनी व शिराओं का एक प्रकार का एक्सरे जैसा अध्ययन है। इसका प्रयोग ह्रदय रोग, किडनी संक्रमण, ट्यूमर और खून का थक्का जमने आदि की जांच में किया जाता है। हृदय के ठीक से काम नहीं करने पर शरीर में रक्त का संचार रुक जाता है। एंजियोग्राफी से हृदय की धमनी में रुकावट व सिकुड़न का पता चल जाता है। एंजियोग्राफी के बाद बीमारी से ग्रसित धमनियों को खोलने के लिए एंजियोप्लास्टी की जाती है। इससे रक्तविहीन मांसपेशियों में खून का प्रवाह बढ़ जाता है और हार्ट अटैक की आशंका कमी हो जाती है।
कोरोना काल में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को कोविड अस्पताल बना देने की वजह से कैथ लैब ताले में बंद हो गई। अब इसे फिर से खुलवाया जा रहा है। साथ ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पीजीआई के अधिकारियों से बात कर झांसी आकर एंजियोप्लास्टी करने पर सहमति भी ले ली है। बताया गया कि हर 15 दिन में पीजीआई के कार्डियोलॉजिस्ट झांसी मेडिकल कॉलेज आकर मरीजों की एंजियोप्लास्टी करेंगे। बीपीएल और आयुष्मान रोगियों के लिए यह नि:शुल्क होगी। वहीं, अन्य मरीजों को स्टंट के महज 25 से 30 हजार रुपये खर्च करने होंगे।
बाहर एक से सवा लाख में होती
सरकारी अस्पतालों में आने वाले 12-15 फीसदी मरीज हाईपरटेंशन व अन्य हृदय रोगों से पीड़ित होते हैं। तमाम मरीजों को एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी की जरूरत पड़ती है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए तो एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी कराना उनकी जेब की पहुंच से बाहर है। जबकि, निजी अस्पतालों में एंजियोग्राफी 10 से 12 हजार और एंजियोप्लास्टी एक से सवा लाख रुपये में होती है।
पीजीआई के कार्डियोलॉजिस्ट झांसी मेडिकल कॉलेज आकर मरीजों की एंजियोप्लास्टी करने पर सहमत हो गए हैं। अब शासन से अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलने पर हर 15 दिन में पीजीआई के कार्डियोलॉजिस्ट मेडिकल कॉलेज आकर एंजियोप्लास्टी करने लगेंगे। मरीजों को सिर्फ स्टंट का पैसा देना होगा। इससे बुंदेलखंड के ह्रदय रोगियों को काफी सहूलियत मिलेगी।
- डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज झांसी।