झांसी। कोरोना टीकाकरण के दौरान वैक्सीन की वॉयल में बची होने के कारण झांसी में लगभग 500 और ललितपुर में 300 डोज को नष्ट करना पड़ा है। वॉयल खुलने के चार घंटे बाद बची कोरोना वैक्सीन की डोज खराब हो जाती है, जिसे नष्ट करना पड़ता है। बताया गया कि नष्ट करने का प्रतिशत लगभग सात है।
कोरोना टीकाकरण के शुरूआत 16 जनवरी को हुई थी। तब से अब तक झांसी में 8131 और ललितपुर में 3121 डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों आदि को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इसमें से झांसी में सात प्रतिशत यानी लगभग 500 डोज को नष्ट करना पड़ा है। जबकि, ललितपुर 300 डोज खराब हो गईं। बताया गया कि एक वॉयल में पांच मिलीलीटर वैक्सीन होती है। प्रत्येक लाभार्थी को 0.5 मिलीमीटर वैक्सीन लगाई जाती है। ऐसे में एक वॉयल से दस लाभार्थियों को वैक्सीन लगती है। वॉयल खोलने से पहले उसमें तारीख और समय दर्ज किया जाता है। वैक्सीन खुलने के चार घंटे बाद वॉयल में जो डोज बच जाती है, उसे नष्ट करना पड़ जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि डोज नष्ट होने का आंकड़ा प्रदेश के अनुमान से कम है। शासन की तरफ से 10 प्रतिशत डोज नष्ट होने का अनुमान लगाते हुए अतिरिक्त वैक्सीन भेजी गई थी।