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Jhansi: जल निगम अफसरों के गले की फांस बना 30 साल पुराना मामला, चुकाना होगा 3.14 करोड़

Wed, 06 May 2026 10:49 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

कोर्ट ने बकाया भुगतान के तीस साल पुराने मामले में जल निगम को 3.14 करोड़ रुपये का भुगतान का आदेश दिया है। भुगतान न होने की दशा में कुर्क के लिए जल निगम की चल एवं अचल संपत्ति का ब्योरा तलब कर लिया है। इससे अफसरों में खलबली मच गई है।
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कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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जल निगम (नगरीय) अफसरों की नींद 30 साल पुराने मामले ने उड़ा रखी है। कॉमर्शियल कोर्ट ने बकाया भुगतान के एक पुराने मामले में जल निगम को 3.14 करोड़ रुपये का भुगतान का आदेश दिया है। इतनी बड़ी रकम का भुगतान कर पाना जल निगम अफसरों के वश में नहीं है जबकि कॉमर्शियल कोर्ट ने भुगतान न होने की दशा में कुर्क के लिए जल निगम की चल एवं अचल संपत्ति का ब्योरा तलब कर लिया है। कुर्की की तलवार लटकने से अफसरों में खलबली मच गई है। अब अफसर किसी तरह भुगतान करने की राह तलाश रहे हैं।
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कार्रवाई की तलवार लटकने से अफसरों में खलबली
वर्ष 1996 में बबीना स्थित फिल्टर प्लांट में जल निगम की ओर से सुभाष प्रोजेक्ट एंड मार्केटिंग लिमिटेड से काम कराया गया था लेकिन, भुगतान में विवाद हो जाने से फर्म को पूरा भुगतान नहीं किया गया। विवाद के बाद कंपनी की ओर से मध्यस्थता कोर्ट की शरण ली गई। मध्यस्थता कोर्ट ने 3 मार्च 2010 को जल निगम अफसरों को बकाया भुगतान का आदेश दिया। इसके बावजूद फर्म का भुगतान अफसर दबाए रहे। इसके बाद यह मामला कॉमर्शियल कोर्ट जा पहुंचा। कोर्ट ने सुनवाई के बाद 13 अप्रैल को खाता अटैच करने के साथ ही गिरफ्तारी वारंट तक जारी कर दिया। गिरफ्तारी वारंट ने जल निगम अफसरों में खलबली मचा दी। गिरफ्तारी एवं कुर्की से बचने के लिए उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यहां से उनको फौरी राहत मिली लेकिन, कोर्ट ने साफ कर दिया कि आगे की सुनवाई के लिए ब्याज समेत 3.14 करोड़ रुपये जमा कराएं। इसके बाद इस मामले के गुण दोष पर विचार होगा।

तीस साल पुराना है मामला
सूत्रों का कहना है कि तीस साल में ब्याज जुड़ने की वजह से यह धनराशि बढ़कर 3.14 करोड़ तक जा पहुंची जबकि शुरुआत में यह काफी कम थी। अधिशासी अभियंता मुकेश पाल की ओर से अधीक्षण अभियंता को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा गया है।
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