बेमौसम बारिश से तापमान में तेजी से गिरावट होने से वायरल, अस्थमा, निमोनिया व संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। सोमवार को मेडिकल कॉलेज में तेज बुखार के 25, निमोनिया व अस्थमा के आठ-आठ रोगी भर्ती किए गए। ओपीडी में 55 फीसदी से ज्यादा रोगियों ने बुखार-जुकाम व खांसी की शिकायत की।
मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. रामबाबू सिंह ने बताया कि बारिश से भले ही हवा में प्रदूषण का स्तर कम हो गया है, मगर हवा में नमी आ गई है। वायरल संक्रमण के रोगियों की दिक्कत एकाएक बढ़ गई है। किसी को तेज बुखार तो किसी का खांसते-खांसते बुरा हाल है। सोमवार को तेज बारिश के बावजूद मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 386 रोगी आए, जिनमें 214 ने तेज बुखार-खांसी और जुकाम की शिकायत की। 80 से ज्यादा रोगियों ने सांस लेने में दिक्कत आदि की समस्या बताई। जांच में पता चला कि अस्थमा और निमोनिया की वजह से आठ-आठ रोगियों की हालत चिंताजनक है। उन्हें तुरंत भर्ती किया गया।
तीन दिन में सही न हों तो डॉक्टर को दिखाएं
डॉ. रामबाबू ने बताया कि आमतौर पर वायरल का संक्रमण परहेज करने से तीन दिन में सही हो जाता है। यदि तीन दिन से ज्यादा समस्या रहती है तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। लापरवाही करने से निमोनिया हो सकता है। उन्होंने बताया कि तापमान में बदलाव होने पर ठंड की वजह से नसें सिकुड़ जाती हैं, इससे खून का बहाव प्रभावित होने से ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है और हृदय रोगियों की दिक्कत बढ़ जाती है। दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।