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Jhansi: तीन साल में बांधों में डूबे 29 युवक, फिर भी जोखिम वाले स्थानों पर रोकथाम नहीं

Wed, 30 Sep 2026 11:11 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

न तो जोखिम वाले स्थानों पर प्रभावी रोकथाम है और न ही पर्याप्त चेतावनी व्यवस्था। नतीजा यह है कि लोग स्पिल-वे और गहरे पानी के किनारे तक पहुंचकर नहाने, सेल्फी और रील बनाने से भी नहीं हिचक रहे हैं।
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डूबने से मौत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बांधों का पानी बुंदेलखंड की प्यास बुझा रहा है, लेकिन इनके किनारे सुरक्षा इंतजामों की कमी लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। झांसी मंडल के बांधों में पिछले तीन साल में 29 युवकों की डूबने से मौत हो चुकी है। इस साल ही नौ युवक जान गंवा चुके हैं।
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पारीछा, सुकुवां-ढुकुवां, पहूज और अठोंदना बांध हादसों के लिहाज से संवेदनशील बने हुए हैं। इसके बावजूद कई जगह न तो जोखिम वाले स्थानों पर प्रभावी रोकथाम है और न ही पर्याप्त चेतावनी व्यवस्था। नतीजा यह है कि लोग स्पिल-वे और गहरे पानी के किनारे तक पहुंचकर नहाने, सेल्फी और रील बनाने से भी नहीं हिचक रहे हैं।

इस साल नौ जिंदगियां गईं, हादसे जारी
23 सितंबर को अठोंदना चेकडैम में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान बीबीए छात्र बलराम वर्मा (23) की डूबने से मौत हो गई। जुलाई में सुकुवां-ढुकुवां बांध में पिकनिक मनाने गए बबीना निवासी धर्मेंद्र अहिरवार (28) सेल्फी लेते समय पानी में बह गए। इसी महीने डोंगरी बांध में दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने पहुंचे अशोक वर्मा (40) की नहाते समय डूबने से जान चली गई। 5 अप्रैल को रक्सा स्थित रेलवे डैम में पिकनिक मनाने पहुंचे 11वीं के चार छात्र रील बनाने के दौरान हादसे का शिकार हो गए। नाव का संतुलन बिगड़ने से चारों बांध में गिर गए। इनमें वेदांश और आतिफ की मौत हो गई, जबकि दो छात्रों को बचा लिया गया।
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पिछले साल भी नहीं थमे हादसे
पिछले साल भी बांधों में डूबने की कई घटनाएं सामने आई थीं। अप्रैल में पारीछा बांध पर पिकनिक के दौरान बीएससी अंतिम वर्ष के छात्र आदित्य राजपूत की नहाते समय डूबने से मौत हो गई। जन्मदिन मनाने पारीछा बांध पहुंचे रिंकू रायकवार (15) की भी जान चली गई। बीटेक छात्र ऋषभ सिजौरिया (26) और उनके ममेरे भाई अभिषेक वर्मा (24) की भी बांध में डूबने से मौत हुई। पुलिस-प्रशासन के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक तीन साल में बांधों में डूबने से 29 युवकों की जान जा चुकी है। हादसों की लगातार घटनाओं के बावजूद संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

स्पिल-वे तक पहुंच रहे लोग, रोकने वाला कोई नहीं
सुकुवां-ढुकुवां बांध में पानी गिरने वाले स्थान के आसपास लोग आसानी से पहुंच जाते हैं। स्पिल-वे के पास खड़े होकर वीडियो और रील बनाने के मामले भी सामने आते हैं। कई जगह गहरे पानी की ओर जाने से रोकने के लिए प्रभावी बैरिकेडिंग नहीं है। पारीछा बांध में भी यही स्थिति बताई जा रही है। प्रशासन की ओर से समय-समय पर चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आती रही है, लेकिन कई संवेदनशील स्थानों पर ये बोर्ड या तो दिखाई नहीं देते या पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में बांध घूमने पहुंचने वाले लोगों के लिए खतरे वाले स्थान की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

रील के लिए जोखिम, हादसे के बाद भी सबक नहीं
सुकुवां-ढुकुवां और पारीछा बांध युवाओं के लिए पिकनिक और वीडियो बनाने के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पानी के तेज बहाव और गहराई का अंदाजा होने के बावजूद लोग स्पिल-वे के आसपास पहुंचकर वीडियो बनाने लगते हैं। करीब 30 फुट ऊंचे हिस्सों तक पहुंचकर रील बनाने के मामले भी सामने आते रहे हैं। जुलाई में सुकुवां-ढुकुवां बांध में जान गंवाने वाले धर्मेंद्र अहिरवार के बारे में भी बताया गया कि वह वीडियो बनाते समय पानी में बह गए थे। इसके बावजूद ऐसे जोखिम वाले स्थानों पर लोगों की आवाजाही रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।

कब होगी स्थायी सुरक्षा व्यवस्था
बांधों पर हादसे अक्सर नहाने, सेल्फी, रील बनाने या पिकनिक के दौरान होते हैं। ऐसे में केवल चेतावनी बोर्ड लगाने से सुरक्षा पूरी नहीं हो सकती। स्पिल-वे और गहरे पानी वाले हिस्सों की बैरिकेडिंग, प्रवेश प्रतिबंध, खतरे के स्पष्ट संकेत, निगरानी और जरूरत के अनुसार रेस्क्यू उपकरण जैसे इंतजाम जरूरी हैं। लगातार हो रहे हादसों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि संवेदनशील स्थानों की पहचान होने के बाद भी वहां स्थायी सुरक्षा व्यवस्था कब होगी।
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