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जानवरों से टकराकर एंबुलेंस पलटी, वृद्ध की मौत

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जानवरों से टकराकर एंबुलेंस पलटी, वृद्ध की मौत
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झांसी। शुक्रवार शाम झांसी - शिवपुरी हाइवे पर करैरा के पास बैठे जानवरों से टकराकर एंबुलेंस पलट गई। इस दुर्घटना में एंबुलेंस से इलाज के लिए झांसी लाए जा रहे वृद्ध की मौत हो गई, जबकि उनका पुत्र घायल हो गया। घायल युवक आईटीबीपी में जवान है।
प्रतापगढ़ के सुल्तानपुर स्थित रिसालगढ़ निवासी सुनील (45) शिवपुरी जिले के करैैरा में बने आईटीबीपी के रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर में तैनात हैं। शुक्रवार शाम वह अपने पिता दान बहादुर सिंह (76) का इलाज कराने एंबुलेंस से झांसी आ रहे थे। अभी एंबुलेंस करैरा से निकलकर कुछ ही दूरी पर पहुंची थी, तभी सामने सड़क पर बैठे जानवरों के झुंड से टकराकर गाड़ी पलट गई। इससेे गाड़ी में सवार पिता व पुत्र घायल हो गए। सूचना पाकर मौके पर पहुंची करैरा पुलिस ने दोनों को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा, जहां चिकित्सकों ने दान बहादुर को मृत घोषित कर दिया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है।
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आए दिन हो रहे हादसों के शिकार
हाइवे पर काल बनकर बैठे जानवरों से टकराकर प्रतिदिन लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। हालत यह है कि बीच जानवरों ने सड़कों को अड्डा बना लिया है। दिन हो या रात इनके विचरण ने राहगीरों की मुसीबतें बढ़ा रखी हैं। यह हाल सिर्फ हाइवे ही नहीं बल्कि महानगर की सड़कों व गलियों में भी बना हुआ है। कमोबेश यही हालात ग्रामीण क्षेत्रों में भी है। लगातार हो रहीं घटनाओं के बाद भी प्रशासन सबक लेने को तैयार नहीं है। रात के समय तो निकलना और भी मुसीबत भरा होता है। रात के समय निकलने वाले वाहनों के चालक को एकाएक जानवर नजर नहीं आते और हादसों का शिकार हो जाते हैं। इससे पहले भी 16 जनवरी को झांसी - शिवपुरी मार्ग पर हादसा हुआ था, जिसमें जानवर आने के कारण एक कार पलट गई थी। इससे मौके पर ही कार सवार संगम विहार कॉलोनी निवासी सैलून संचालक आबिद खान व उनके पुत्र फरहाज की मौत हो गई थी।
वाहन ने पांच जानवरों को रौंदा
झांसी। शुक्रवार रात थाना रक्सा क्षेत्र मेें हाइवे पर तेज रफ्तार वाहन ने सड़क पर बैठे पांच जानवरों को रौंद दिया। मौके पर ही तीन की मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए। सूचना पाकर मौके पर पहुंची नगर निगम की टीम ने घायल दो जानवरों का उपचार कराया है। बताया गया है कि यहां प्रतिदिन हादसे होने के कारण जानवर घायल हो जाते हैैं।
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बन रही विवाद की स्थिति
रात होते ही छुट्टा पशुओं से छुटकारा पाने के लिए ग्रामीण गांव की सीमा से दूर खदेड़ते है। अंधेरे का फायदा उठाकर लोग पशुओं के झुंड को सड़कोें पर ही छोड़कर चले जाते हैं। अपने क्षेत्र से जानवरों के झुंड को गुजरता देख उस गांव के ग्रामीण लाठी डंडा लेकर सड़कों पर आ जाते हैं, ताकि खदेड़ने वाले लोग इन पशुओं को यहीं छोड़कर न चले जाएं। इससे कई जगह विवाद की स्थिति भी बन चुकी है।
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