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सिद्धचक्र महामंडल विधान में जमकर झूमे भक्त

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झांसी। जैन धर्म के अष्टान्हिका पर्व के मौके पर अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में रविवार को सिद्धचक्र महामंडल विधान शुरू हुआ। इस दौरान इंद्र-इंद्राणियों ने सिद्ध भगवंतों की आराधना करते हुए अर्घ्य चढ़ाए। वहीं धार्मिक भजनों पर भक्त जमकर झूमे।
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विधान के मौके पर आचार्य प्रमुख सागर महाराज ने कहा कि अपनी बुराइयों और दूसरों के गुण देखना सीख लोगे, तो एक दिन जरूर ही तुम्हारा जीवन पावन, परम पवित्र बन जाएगा और पूज्यता को भी प्राप्त हो जाए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि महायज्ञ मनोरंजन नहीं बल्कि आत्म रंजन का महायज्ञ है। जिसमें जीवन जीने की शैली का परिचय होगा। इससे पूर्व ब्रह्मचारी त्रिलोक जैन और पंडित राहुल शास्त्री के निर्देशन में निकाली गई घटयात्रा में पीत वस्त्रधारी इंद्राणियों ने अनूठी छटा बिखेरी। विधान के दौरान ध्वजारोहण उत्तरांचल दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष शैलेंद्र रश्मि जैन और महामंत्री प्रवीण कुमार जैन ने किया।
महायज्ञ में सौधर्म इंद्र शैलेंद्र जैन अलीगढ़, महा यज्ञ नायक इंजी हुकुमचंद जैन, यज्ञनायक अशोक जैन रतनसेल्स, चक्रवर्ती प्रवीण कुमार जैन, कुबेर शेखर चंद्र जैन, ईशान इंद्र डॉ हीरालाल जैन, सनत कुमार इंद्र सुनील जैन और महेंद्र इंद्र बनने का सौभाग्य भाग चंद्र जैन को प्राप्त हुआ। इस मौके पर सैकड़ों इंद्र-इंद्राणियों ने सिद्ध भगवंतों की पूजा की। इस मौके पर पंचायत उपाध्यक्ष रविंद्र जैन, कोषाध्यक्ष जितेंद्र चौधरी, संजय जैन, डॉक्टर केसी जैन, प्रभात जैन, अरुण जैन, हुकुमचंद जैन मौजूद रहे। महामंत्री प्रवीण कुमार जैन ने बताया कि महायज्ञ प्रतिदिन सुबह सात बजे से शुरू होगा। इसके बाद आचार्य प्रमुख सागर महाराज के प्रवचन, स्वाध्याय, गुुरुभक्ति, आरती और शास्त्र सभा के कार्यक्रम होंगे।
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