फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सल्लेखना आत्मसाधना है, आत्महत्या नहीं

Tue, 18 Aug 2015 01:09 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन
ललितपुर। राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा जैन धर्म की संथारा और सल्लेखना साधना प्रथा को आत्महत्या बताते हुए रोक लगा दी है। इसको लेकर जैन समुदाय व्यथित है। वक्ताओं ने कहा कि सल्लेखना आत्म साधना है, आत्महत्या नहीं। प्रभावना जन कल्याण परिषद ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
विज्ञापन



संस्था निदेशक डा. सुनील संचय ने कहा कि जैन समाज ने सदैव न्याय व्यवस्था का सम्मान किया है, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट के ताजा निर्णय से मन व्यथित है। सदियों पुरानी प्राचीन संथारा व सल्लेखना साधना की प्रथा पर रोक लगाते हुए इसे आत्महत्या की श्रेणी में रखा है। उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से अवश्य न्याय मिलेगा। अक्षय अलया ने कहा कि जैन धर्म अहिंसक समाज है। प्राचार्य विनीत शास्त्री ने कहा कि तपस्या करने का अधिकार प्रत्येक साधक को है। राजेश शास्त्री ने कहा कि संल्लेखना साधना है। पुष्पेंद्र जैन, सुरेंद्र जैन, मुकेश शास्त्री आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया गया।



ज्ञापन पर  डा. सुनील संचय, अक्षय अलया, मुकेश शास्त्री, राजेश शास्त्री, सोमचंद्र शास्त्री, प्राचार्य विनीत शास्त्री, पुष्पेंद्र जैन, संतेाष शास्त्री, शीतलचंद्र जैन, सुरेंद्र जैन, प्रियंका जैन, मनीष शास्त्री, निर्मल शास्त्री, प्रदीप जैन, प्रकाशचंद्र जैन, हरीश जैन, मंजू जैन, धर्मेंद्र जैन, उमेश शास्त्री, सुरेश मारौरा, सुनील शास्त्री, श्रेयांस जैन, महेश शास्त्री, जितेंद्र जैन आदि के हस्ताक्षर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें