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पुराने कैदी लौटे नहीं, अब फिर से पैरोल पर छोड़ने की तैयारी

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झांसी। कोरोना संक्रमण के चलते पिछले साल पैरोल पर रिहा किए गए कैदी अब तक वापस नहीं लौटे हैं। वहीं अब फिर से पैरोल पर कैदियों को रिहा करने की तैयारी की जा रही है। इनको साठ दिन के पैरोल अथवा अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाएगा। इसके साथ उन कैदियों को छोड़ा जाएगा, जो सजा पूरी करने के बाद अर्थदंड न चुकाने की वजह से कारागार में हैं। शासन से निर्देश मिलने के बाद झांसी जेल में भी ऐसे कैदियों की सूची बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय कमेटी ने इस संबंध में निर्देश दिए हैं। न्यायिक अधिकारी जेल में जाकर साठ दिन की पैरोल अथवा आंतरिम जमानत पर रिहा कराने की कार्रवाई करेंगे। इसको देखते हुए ऐसे कैदियों की सूची तैयार की जा रही कि जिनकी सजा सात वर्ष से कम हो। ऐसे कैदियों को ही साठ दिन का विशेष पैरोले अथवा अंतरिम जमानत का लाभ दिया जाएगा। उधर, इसके लिए उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने कमेटी बनाई है। इसके जरिए यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। न्यायिक अधिकारियों को 15 मई तक कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही कि 15 मई से पहले कैदियों की पैरोल पर छोड़ दिया जाएगा। कैदियों को पेंडेमिक पैरोल अथवा अंतरिम जमानत पर रिहाई योजना में से किसका लाभ मिलेगा, इसका भी पूरा ब्यौरा दर्ज होगा। इसके पहले योजना के तहत 30 मई तक कैदियों को कोर्ट में पेश होने पर रोक लगाई जा चुकी है। जो कैदी पहले से पैरोल पर हैं, उनकी पैरोल भी साठ दिन बढ़ाने की बात कही गई है। कारागार प्रशासन को भेजे गए पत्र में शांतिपूर्ण पैरोल के बाद समर्पण कर चुके कैदियों को भी इसका लाभ देेने को कहा गया है। उधर, कारागार अधीक्षक का कहना है शासन के निर्देश पर जेल में कैदियों की सूची बनाई जा रही है। उनका कहना है करीब सौ कैदियों को पैरोल का लाभ मिल सकता है हालांकि अंतिम संख्या पड़ताल के बाद ही तय होगी।
पिछली बार पैरोल में छूटे कैदियों ने जमकर कराई थी मशक्कत
कोविड महामारी को देखते हुए पिछले वर्ष भी मार्च माह में कैदियों को पैरोल पर छोड़ा गया था लेकिन, तयशुदा समय तक सिर्फ पांच कैदी ही वापस लौटे। बाद में शेष कैदियों की तलाश में कारागार प्रशासन को पुलिस की मदद लेनी पड़ी थी। काफी खोजबीन के बाद कैदी वापस मिल सके थे। पिछली बार कोरोना संक्रमण बढ़ने पर झांसी से कुल 46 कैदियों की पैरोल मार्च महीने में मंजूर हुई थी। शुरूआत में पैरोल आठ सप्ताह के लिए दी गई लेकिन, बाद में इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाता रहा। नवंबर महीने में सरकार ने पैरोल नहंी बढ़ाया। पैरोल खत्म होने के बाद सभी कैदियों को वापस बुलाया गया लेकिन, 46 कैदियों में सिर्फ 5 कैदी ही जेल में वापस पहुंचे। शेष कैदी अपने दर्ज पते पर भी नहीं मिले। इनकी तलाश के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कुछ कैदी अभी भी फरार बताए जा रहे हैँ। ललितपुर जनपद में भी यही हाल था। ललितपुर में कुल 28 कैदियों की पैरोल मंजूर हुई थी लेकिन, यहां सिर्फ 11 कैदी ही वापस लौटे थे। यहां भी पुलिस की मदद से लापता कैदियों की तलाश की गई थी।
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