बड़ागांव ब्लॉक के गांव मुस्तरा में स्थित है यह उच्च प्राथमिक विद्यालय। मुख्य मार्ग से 200 मीटर दूर है। कच्चा मार्ग होने की वजह से बारिश के दिनों में यहां कीचड़ हो गया है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को घर से स्कूल और स्कूल से घर कीचड़ में चलकर जाना पड़ता है। कई बच्चे तो फिसलन की वजह से गिर तक जाते हैं। सड़क निर्माण को लेकर कई बार अधिकारियों की चौखट तक दरखास्त पहुंची, मगर कुछ नहीं हुआ।
शासन का दावा है कि सरकारी स्कूलों में कान्वेंट जैसी पढ़ाई हो रही है। हकीकत परखने पर समय-समय पर इन दावों की तो पोल खुलती रहती है। मगर कई सरकारी स्कूलों तक का सफर करना भी छात्र-छात्राओं के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। इन्हीं स्कूलों में एक है मुस्तरा स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय। बताया गया कि ये स्कूल 2013-14 में शुरू हुआ। अभी इसमें कक्षा छह से आठवीं तक 50 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। मुख्य मार्ग से ये स्कूल 200 मीटर दूर है, जो कि कच्चा है। बारिश होने की वजह से यहां पर कीचड़ और फिसलन हो गई है। गड्ढे इतने बड़े हैं कि बारिश होने पर विद्यार्थियों के घुटनों तक पानी भर जाता है। स्कूल आते-जाते समय हाथ में लेकर या फिर बैग में जूते-मोजे रखकर विद्यार्थी जाते हैं। शिक्षकों ने बताया कि कई विद्यार्थी फिसलकर गिर भी जाते हैं। विद्यार्थी भी बताते हैं कि घर पहुंचने पर परिजन गंदे कपड़े देखकर बहुत नाराज होते हैं।
गीले कपड़े पहनकर बैठे रहते छात्र, हो सकती बीमारी
कीचड़ में सनने के बाद छात्र-छात्राओं की ड्रेस गीली हो जाती है। घंटों वो यही गीली ड्रेस पहनकर बैठे रहते हैं। ऐसे में उन्हें खुजली से लेकर त्वचा संबंधी रोग भी हो सकता है।
बुंदेलखंड विकास निधि से स्वीकृत है एपेक्स मार्ग
ग्राम प्रधान प्रमोद कुमारी ने बताया कि बुंदेलखंड विकास निधि से छह महीने पहले एपेक्स मार्ग स्वीकृत किया गया था। मगर गांव के कुछ लोग इसे बनने नहीं दे रहे हैं। वो लोग कहते हैं कि ये जमीन उनकी है। जबकि, इसका पट्टा निरस्त करके ग्राम सभा के नाम जमीन दर्ज कर दी गई है। दो महीने पहले भी जब इस मार्ग पर मिट्टी डाली जा रही थी, तब भी उन लोगों ने विरोध कर काम रुकवा दिया। सोमवार को भी मिट्टी डालने का काम शुरू हुआ तो मजदूरों को भगा दिया।
अभी ये मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मंगलवार को खंड शिक्षा अधिकारी को मौके पर भेजकर जानकारी की जाएगी। इसके बाद समस्या का निस्तारण किया जाएगा।
- नीलम यादव, बीएसए।