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Jhansi News: संसार को समझने से पहले स्वयं को जानना जरूरी

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श्री दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर में आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने दिए प्रवचन
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। श्री दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर में आर्यिका गणिनी स्वस्ति भूषण माताजी ने कहा कि आज हम स्वयं को जान नहीं पाते हैं और सारे संसार को जानने की चेष्टा करते हैं, लेकिन संसार को समझने से पहले हमें स्वयं को जानना जरूरी होगा। तभी हम परम सुख प्राप्त कर पाएंगे।
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धर्मसभा में उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रतिस्पर्धा, प्रदर्शन, प्रतिष्ठा एवं अभिमान की आकांक्षा से भरे रहने के कारण दुखी है। दुख बाहर से नहीं, बल्कि अंदर की आकांक्षा से आता है। मनुष्य जिस अभिमान एवं प्रतिस्पर्धा को अपने भीतर सुख प्राप्ति का मार्ग मानता है, वही उसके दुख का कारण बन जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को बाल्य अवस्था से ही धार्मिक संस्कार देना चाहिए। धर्मसभा में पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन, निलय जैन, चौधरी जितेंद्र जैन, राजीव अहिंसा, भाग्यचंद्र जैन, शिरोमणि जैन, राजकुमार बाबा, अशोक जैनिथ, रविंद्र जैन, पदमचंद्र जैन, वीरेंद्र जैन, शीला जैन, रजनी जैन, रजनी जैनको, शर्मिला जैन, सरिता जैन, नीलम जैन, प्रवीण जैन, विजय जैन, विनोद जैन ठेकेदार, इंजी. केसी जैन आदि मौजूद रहे। वहीं, आर्यिका संघ ने झांसी के किले का भ्रमण किया। महामंत्री कमल जैन ने बताया कि विश्व शांति की कामना के लिए आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के सानिध्य में सात जनवरी को जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव श्री अतिशय क्षेत्र करगुवां जी में मनाया जाएगा।
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