झांसी। पीडब्ल्यूडी में तबादलों में हुए खेल की आंच बुंदेलखंड भी पहुंच गई है। स्थानांतरण नीति का पालन किए बगैर मनमर्जी तरीके से इधर-उधर किए गए अभियंताओं ने यहां भी तैनाती पाई है। यहां विभिन्न सर्किल में कुल 37 तबादले हुए। इनमें से कई तबादले स्थानांतरण नीति के विपरीत होने के साथ ही उनमें मनमानापन पाया गया। कई वर्ष पहले मृत हो चुके अभियंता को झांसी में तैनात कर दिया गया जबकि जिस नाम का कोई जेई था ही नहीं उसकी भी तैनाती झांसी वृत्त में कर दी गई।
तबादला सूची आने के बाद से खलबली मची है। फिरोजाबाद में तैनात रहे एई घनश्याम दास कासवाल का तबादला झांसी कर दिया गया था जबकि उनकी मौत तीन साल पहले हो चुकी। इसी तरह जेई की तबादला सूची में इटावा से राजकुमार का नाम दर्ज था। उनको झांसी भेजा गया लेकिन, पड़ताल में इस नाम एवं संख्या का कोई जेई नहीं मिला। शासन की तयशुदा स्थानांतरण नीति का पालन किए बगैर मनमर्जी तरीके से अभियंता इधर से उधर किए गए। जिले में तीन साल एवं मंडल में सात साल की सेवा के बाद स्थानांतरण के नियम का भी पालन नहीं हुआ। बुंदेलखंड में मुख्य अभियंता स्तर के एक अफसर की पूरी नौकरी ही यहीं बीत गई। वह जेई से लेकर अधीक्षण अभियंता तक यहीं तैनात रहे। झांसी में तैनाती पाए एक अधीक्षण अभियंता को तत्कालीन विभागाध्यक्ष के सजातीय होने के नाते यहां भेजे जाने की चर्चा है। कई जेई एवं एई भी एक ही मंडल एवं जिले में 15-20 साल से जमे हैं। उनको वहीं बरकरार रखा गया। पिछले वर्ष बांदा में आए अधिशासी अभियंता को समय से पहले हटाकर वाराणसी भेज दिया गया। सूत्रों के मुताबिक बुंदेलखंड में हालिया तबादलों के दौरान कुल अभियंताओं के हुए कुल 37 तबादलों की भी जांच के दायरे में हैं।