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कारोना ने निगल ली शौचालयों की जांच

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कारोना ने निगल लीं शौचालयों की जांच 726 गावों में व्यक्तिगत शौचालयों की जांच अधूरी   झांसी। स्वच्छ भारत मिशन के तहत घरों में शौचालय बनाए जाने में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद शासन स्तर पर जांच कराने के निर्देश दिए गए। कुछ समय तेजी से जांच शुरू हुई लेकिन बाद में धीमी पड़ गई। उसके बाद मार्च महीने से जांच का कुछ भी अता-पता नहीं चला। इस बीच नए शौचालय बनाए जाने के लक्ष्य भी सरकार की ओर से दे दिए गए। ग्रामीण स्वच्छ भारत मिशन के तहत झांसी में 726 गांवों को वर्ष 2019 में ओडीएफ घोषित कर दिया गया। ओडीएफ घोषित होने के बाद व्यक्तिगत शौचालय निर्माण में गड़बड़ियों की शिकायतें मिलीं। शिकायतों में कहा गया कि कई जगह सिर्फ गढ्ढे ही खोदे गए। कई जगह निर्माण पूरे हुए बिना उसे निर्मित बता दिया गया। शासन ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मई 2019 में सत्यापन शुरू कराने के निर्देश दिए गए लेकिन अभी तक इस सत्यापन की रिपोर्ट तक नहीं बनी है। उसके बाद मंडल स्तर पर एक दूसरी जांच भी आरंभ हुई। इसमें रस्मी तौर पर 290 गांवों में बनवाए गए शौचालयों की ही जांच हुई। शेष ग्रामों की जांच अभी तक अधूरी है हालांकि शुरूआत में इस जांच में कुछ तेजी दिखाई गई थी। निगरानी के लिए ब्लॉक स्तर पर अफसरों की ड्यूटियां लगाई गईं लेकिन मार्च महीने के आते-आते जांच ठंडे बस्ते में पहुंच गई हालांकि इस बारे में कोई भी अफसर कुछ बोलने को राजी नहीं है। वहीं, इस वर्ष के लिए 5221 व्यक्तिगत शौचालए बनाए जाने का लक्ष्य भी तय कर दिया गया। इनसेट तत्कालीन डीपीआरओ हुए थे निलांबित शौचालय निर्माण एवं उनके सत्यापन में गड़बड़ी के ही आरोप में यहां के तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी अष्टप्रकाश त्रिपाठी को 30 अक्तूबर को निलांबित कर दिया गया था। उस दौरान इस मामले में अन्य अफसरों पर भी फंदा कसने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन, इतने समय तक जांच पूरी न होने से सभी को राहत मिलती दिखती है।
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