झांसी। ये रानी लक्ष्मीबाई के नगर की बेटियों की उड़ान है...। क्षेत्र चाहे पराक्रम का हो, गीत-संगीत या फिर ज्ञान-विज्ञान का। कम उम्र में ही बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल कर इन बेटियों ने देश-विदेश में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। लेकिन उन्हें अपनी मंजिल नहीं मिली है। हौसला इस कदर है कि एक के बाद एक ऊंचाई छूने को बेताब हैं। परिजनों, गुरुजनों, शहर और देश का मान बढ़ाने वाली ये बच्चियां प्रेरणा दे रही हैं लड़कियों को आगे बढ़ाने की।
योग ने दिलाई पहचान : लगन लाक्षाकार
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एंबेस्डर लगन लाक्षाकार (12) बहुत कम उम्र में ही योग में पारंगत हैं। योग के साथ ही जिमभनास्टिक, जीत कुनेडो मार्शल आर्ट्स, ताईक्वांडो, स्विमिंग, कराटे, बॉक्सिंग, जूडो में भी वह देश विदेश में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं। उन्हें इतनी कम उम्र में ही चार अंतरराष्ट्रीय मेडल मिल चुके हैं। उन्होंने मार्च 2018 में देश को गोल्ड मेडल का सम्मान दिलाया। आठ खेलों में कुल 21 गोल्ड मेडल भी प्राप्त किए। थाईलैंड और उज्बेकिस्तान में बेहतरीन प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन किया। उनके पिता अरविंद लाक्षाकार को लगन का पिता होने पर गर्व है।
गायन कर देता है मंत्रमुग्ध: माही राज
झांसी की ही माहेरश राज (माही) विभिन्न स्तरीय प्रतियोगिताओं में शास्त्रीय संगीत, अभिनय में अपना हुनर दिखा चुकी हैं। 2019 में महाराष्ट्र मंडल कानपुर की संगीत प्रतियोगिता में शास्त्रीय व उप शास्त्रीय प्रतियोगताओं में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। 2019 में ही सोनी टीवी इंटरनेशलन चैनल के सुपर स्टार सिंगर के मंच से मेरे मौला करम हो करम गाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया था। 2017 में ग्वालियर संगीत प्रतियोगिता में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। पिता फारुक पाशा ने कहा कि जब-जब बेटी कुछ हासिल करती है। उनका सर फक्र से उठ जाता है।
ताकि गरीबों को भी मिल सके एसी की हवा: कल्याणी श्रीवास्तव
कल्याणी श्रीवास्तव ने महज 1850 रुपये में सोलर एयर कंडीशनर तैयार कर राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी को अचरज में डाल दिया था। उस वक्त वह 11वीं की छात्रा थीं। जापान ने भी उनके इस प्रयोग को तवज्जो दी थी। हालांकि सरकारी ढर्रे की वजह से वहां होने वाले सम्मेलन में वह सहभाग नहीं कर सकीं। कल्याणी के अनुसार गरीबों को एसी की हवा दिलाने के लिए उन्होंने प्रयोग किया था। एक आइस बॉक्स, सीपीयू, सोलर पैनल, एग्जॉस्ट फैन की मदद से एसी तैयार कर दिया था। कल्याणी को संगीत में भी विशेष रुचि है। शास्त्रीय गायन के लिए उन्हें संगीत अकादमी से पुरस्कार भी मिल चुका है।
मार्शल आर्ट ने बढ़ाया आत्मविश्वास: अनुराजा परमार
जीत कुनैडो मार्शल आर्ट्स की खिलाड़ी आजादपुरा नगरा प्रेमनगर निवासी अनुराजा परमार (9) ने देश के कई राज्यों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी झांसी का नाम रोशन किया है। उन्हें दो बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक मिले हैं। पश्चिम बंगाल, पुणे, उज्जैन, दिल्ली, मुंबई, महाराष्ट्र, उत्तराखंड में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी स्वर्ण पदक प्राप्त कर चुकी है। अनुराजा ने गोवा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी स्वर्ण पदक हासिल किया। वह खेलो इंडिया और ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। अनुराजा के पिता राजा भैया को बेटी की उपलब्धियों पर गर्व है।
परिश्रम ने लगा दी मेडल की झड़ी: साक्षी यादव
जीत कुनैडो मार्शल आर्ट्स की खिलाड़ी कैंट की राय कॉलोनी निवासी साक्षी यादव (16) ने भी देश-विदेश में नाम रोशन किया है। उन्हें तीन बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक मिले हैं। इसके साथ ही मुंबई, दिल्ली, पुणे, उज्जैन, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड में आयोजित कई प्रतियोगिताओं में भी गोल्ड व सिल्वर मेडल मिले हैं। गोवा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी साक्षी ने स्वर्ण पदक हासिल किया। उसके पिता रामाशंकर ने बताया आत्मरक्षा व जीवन की हर चुनौती का सामना करने के बेटियों को सक्षम बनाना ही होगा। उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। वह भी ओलंपिक खेलने की तैयारी कर रही है।
अनुराजा परमार
साक्षी यादव