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झांसी में पिछले दो सालों से गिरता जा रहा इंटरमीडिएट का रिजल्ट

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झांसी। माध्यमिक शिक्षा परिषद में हाईस्कूल के विद्यार्थियों ने इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को पछाड़ दिया है। इस बार हाईस्कूल का परिणाम 86.60 प्रतिशत और इंटरमीडिएट का 76 प्रतिशत रहा। यह हालात इस बार के नहीं है। कोरोना काल को छोड़ देें तो बीते दो सालों में हाईस्कूल के बच्चे इंटर वालों से आगे रहे हैं। इसे विभागीय अफसर सामान्य बदलाव कह रहे हैं, लेकिन पिछले दो सालों से इंटर का गिरता परिणाम चिंता का विषय बन रहा है।
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विद्यार्थियों के लिए शिक्षा क्षेत्र में हाईस्कूल के बाद इंटरमीडिएट के परिणाम को अहम माना जाता है। इंटरमीडिएट के परिणाम के जरिए ही विद्यार्थी कॅरियर की राह तय करते हैं। अगर यहां परिणाम प्रतिशत कम हो तो विद्यार्थी को स्नातक में अपने पसंदीदा कोर्स या पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है। मगर लगातार दो साल से झांसी में इंटरमीडिएट का परिणाम प्रतिशत गिर रहा है। इस बार के परिणाम पर भी नजर डालें तो इंटरमीडिएट में कुल 7490 विद्यार्थी फेल हो गए। यानी कि ये विद्यार्थी अपने कॅरियर में अब एक साल पीछे हो गए। जबकि हाईस्कूल में कुल 4207 विद्यार्थी फेल हुए। इससे साफ है कि कॉलेजों में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पर खासा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि साल दर साल पाठ्यक्रम में कमी आ रही है। शिक्षकों का कहना है कि लगातार बढ़ रहा मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी विद्यार्थियों के प्रदर्शन पर प्रभाव डाल रहा है। वहीं शिक्षकों से बढ़ रही विद्यार्थियों से दूरी भी रिजल्ट को प्रभावित करती है।
जबकि डीआईओएस कोमल यादव बताते हैं कि शिक्षक के पढ़ाने के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई भी परिणाम तय करती है। कभी हाईस्कूल का कम तो कभी इंटरमीडिएट का कम ये सामान्य है।
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ये हो सकते हैं कारण
- मोबाइल की तरफ बढ़ा रुझान।
- सोशल मीडिया पर बढ़ रही विद्यार्थियों की सक्रियता।
- हाईस्कूल के प्रतिशत से बढ़ता अति आत्मविश्वास।
- हाईस्कूल के बाद विद्यार्थियों की स्कूल में कम उपस्थिति।
- विद्यार्थियों का स्कूल से ज्यादा कोचिंग की तरफ होता रुझान।
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पिछले दस सालों का रिजल्ट
वर्ष हाईस्कूल इंटरमीडिएट
2011 62.97 70.91
2012 81.73 86.90
2013 77.74 94.80
2014 75.89 92.95
2015 78.47 92.99
2016 84.10 91.35
2017 74.21 86.00
2018 79.32 79.40
2019 82.76 74.24
2020 86.16 83.65
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