भारी भरकम थ्रीनॉटथ्री की जगह अब पुलिस के सिपाही हाईटेक इंसास रायफल लिए दिख रहे हैं। शासन ने 650 अत्याधुनिक रायफल और 200 पिस्टल की पहली खेप भेज दी है, जिसे पुलिस वालों को सौंप दिया गया है। जल्द ही और असलहे आने की उम्मीद है।
सटीक निशाना एवं कम मेंटनेंस वाली इंसास को चलाने की ट्रेनिंग सिपाहियों को दी जा रही है। पुरानी थ्री नॉट थ्री रायफल का वजन बहुत ज्यादा होने से पुलिस कर्मियों को इसे साथ लेकर चलने में परेशानी होती थी। छोटे हथियारों से पुलिस का काम काफी आसान हो गया है। जानकारों की मानें को थ्री नॉट थ्री रायफल के कारतूस की आपूर्ति बंद होने के कारण इसको हटाना पड़ा है।
एक साथ कई फायर
बदलते जमाने में अपराधी भी आधुनिक हो गए हैं। स्थिति यह है कि पुलिस से ज्यादा अपराधियों के पास आधुनिक हथियार मिल रहे हैं। ऐसे में अपराधियों से निपटने के लिए पुलिस को आधुनिक हथियार की पहल की गई है। क्योंकि पुराने जमाने की थ्री नॉट थ्री से विपरीत परिस्थितियों में पुलिसकर्मी एक बार में एक ही फायर कर पाता था, लेकिन आधुनिक बंदूक मिलने के बाद एक के बाद एक दनादन फायर कर सकती है।
इतिहास बनी थ्री नॉट थ्री
वक्त के साथ थ्री नॉट थ्री भी पुरानी हो चुकी है। इस रायफल ने सौ साल के सफर में कई बार इतिहास का रुख भी पलट दिया। अब यह रायफल बदलते दौर में अपराधियोें से लोहा नहीं ले पा रही थी। थ्री नॉट थ्री रायफल करीब सौ साल पहले प्रथम विश्व युद्घ 1914-1918 के दौरान दुनिया के सामने आई थी। भारतीयों ने द्वितीय विश्व युद्घ के दौरान 1939-1945 में इसे पहली बार उठाया था।
इंसास की खासियत
इंसास - बोर 5.56 एमएम
प्रकार - सेमी ऑटोमेटिक
मारक क्षमता - 200 मीटर
वजन - 4.2 किलोग्राम लगभग मैग्जीन के साथ व बिना मैग्जीन के 3.800 किलोग्राम
मैग्नीज प्रकार - फाइबर
मैैग्जीन क्षमता - 20 कारतूस
पिस्टल की खासियत
ग्लाक पिस्टल - बोर 9 एमएम
प्रकार - सेमी ऑटोमेटिक
मारक क्षमता - 50 मीटर
वजन - 1.2 किलोग्राम मैग्जीन के बिना व बिना मैग्जीन के 900 ग्राम
मैग्जीन का प्रकार - फाइवर
मैग्जीन की क्षमता - 10 कारतूस
जरूरी हैं आधुनिक हथियार
पुलिस को आधुनिक हथियार मिलना जरूरी हैं। समय-समय पर पुलिस के शास्त्रागार में आधुनिक हथियार शामिल होते रहते हैं। इसी के चलते आधुनिक हथियारों की खेप जिले की पुलिस को मिली है। थानों में पहुंचाने की प्रक्रिया लगातार जारी है।
जेके शुक्ल, एसएसपी