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Jhansi News: मोबाइल की लत से दर्द के भंवर में फंस रहे मासूम

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पांच से 10 वर्ष के बच्चे हो रहे कमर और गर्दन दर्द के रोगी, बाहर नहीं खेलने से हड्डियां हो रहीं कमजोर
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- मेडिकल कॉलेज में रोजाना आ रहे ऐसे पांच से छह बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मोबाइल व कंप्यूटर की लत मासूमों को हड्डी का रोगी बना रही है। कोई कमर दर्द तो कोई गर्दन दर्द से परेशान हो रहा है। आउटडोर (मैदान) खेल में कम रुचि होने से हड्डियां कमजोर हो रही हैं।
हड्डी रोग विभाग के डॉक्टर सौरभ अग्रवाल ने बताया कि मोबाइल और कंप्यूटर की लत बच्चों में कई विकार पैदा कर रही है। उम्रदराज लोगों को होने वाला कमर व गर्दन दर्द अब बच्चों में होने लगा है। इसकी वजह पलंग, कुर्सी, सोफा पर आराम की मुद्रा में बैठकर बच्चों का कई घंटे तक मोबाइल देखना है। बच्चे मोबाइल पर खेल खेलने में इतना डूब जाते हैं कि खेलते-खेलते सो भी जाते हैं। इससे बच्चों के बैठने का तरीका बदल जाता है और हड्डियों पर असर पड़ता है। लगातार गर्दन का झुकाए रखना भी दर्द की वजह है, इससे स्पांडलाइटिस की भी समस्या हो जाती है।
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उन्होंने बताया कि ज्यादा कमरे में रहने की वजह से भी बच्चों की हड्डियां कमजोर हो रही हैं। विटामिन डी-3 की कमी से शरीर कमजोर पड़ जाता है। उन्होंने बताया कि पांच साल पहले मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बमुश्किल एक माह के अंदर एक बच्चा कमर और गर्दन दर्द का आता था, जो अब पांच से छह तक पहुंच गई है।


0- बच्चों को खेलने बाहर भेजें

हड्डी रोग विभाग के डॉक्टर ने बताया कि बच्चे खेलने की उम्र में कमरे से बाहर निकलना पसंद नहीं कर रहे हैं, जो अच्छे संकेत नहीं हैं। बच्चों की हड्डियां कमजोर होती जा रही हैं, जो आने वाले समय में काफी कष्टदायी होगी। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को खेलने के लिए बाहर भेजें।
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0-वर्जन

यह चिंता की वजह है कि पांच से 10 वर्ष के बच्चे कमर दर्द और गर्दन दर्द के रोगी हो रहे हैं। इनकी संख्या पांच साल में काफी बढ़ गई है। इन दिनों पांच से छह बच्चे रोजाना उपचार कराने आ रहे हैं।

डॉ. सौरभ अग्रवाल, हड्डी रोग विभाग
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