भारतीय रेलवे ने दुनिया की पहली ‘ग्रीन रेलवे’ बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें सौर और पवन ऊर्जा (सोलर और विंड एनर्जी) के जरिये पैदा होने वाली बिजली का ही इस्तेमाल किया जाएगा। इस दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। बतौर पायलट प्रोजेक्ट रेलवे का बीएचईएल से दो मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का करार हुआ है। इस प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसका विस्तार किया जाएगा।
रेलवे का साल 2022 तक शत प्रतिशत विद्युतीकरण और 2030 तक ग्रीन रेलवे बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें सौर और पवन ऊर्जा के जरिये रेलवे अपनी जरूरतें पूरी करेगा। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए रेलवे ने भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) से करार किया है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बीएचईएल दो मेगावाट सोलर एनर्जी का उत्पादन करेगा, जिसका इस्तेमाल रेलवे द्वारा किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
रेलवे बोर्ड के सदस्य (ट्रैक्शन) घनश्याम सिंह ने बताया कि भारतीय रेलवे को विश्व की पहली ग्रीन रेलवे बनाने का सपना देखा गया है, जिसमें शत प्रतिशत वैकल्पिक ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा। इस दिशा में दो मेगावाट के पायलट प्रोजेक्ट पर हमने बीएचईएल के साथ मिलकर काम शुरू किया है।