झांसी। भारत सरकार के साथ मिलकर जर्मन सरकार जिले में गिरते भूगर्भ जल स्तर और जलवायु परिवर्तन की दशा संभालेगी। इसके लिए दोनों सरकारों के साझा प्रोजेक्ट वाटर सिक्योरिटी एंड क्लाइमेट एडॉप्टेशन (वासका) के तहत प्रदेश के चार जिलों के साथ झांसी का चयन हुआ है। शुरुआत बबीना विकासखंड के दो गांवों से होगी। बाद में तीन ब्लॉकों के पच्चीस-पच्चीस गांवों को इसमें शामिल किया जाएगा।
कम बारिश की वजह से जिले के कई इलाकों में भूगर्भ जल का स्तर काफी नीचे सरक गया है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन की वजह से अक्सर जिले में असमय बारिश हो जाती है या तापमान एकदम से बढ़ जाता है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। इस पर नियंत्रण के लिए वासका के तहत जिले का चयन हुआ है। जर्मन और भारत सरकार के इस संयुक्त प्रोजेक्ट में देश के पांच राज्य उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक व तमिलनाडु को जोड़ा गया है।
उत्तर प्रदेश के चार जिले इसमें शामिल किए गए हैं। इनमें झांसी के अलावा मथुरा, बाराबंकी व बरेली को शामिल किया गया है। झांसी के तीन ब्लॉकों के 25-25 गांवों को इसमें शामिल किया जाना है। फिलहाल शुरुआत बबीना ब्लॉक के ग्राम चमरौआ व मानपुरा से होने जा रही है। प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के लिए नोडल विभाग मनरेगा को बनाया गया है। योजना के तहत सभी कार्य मनरेगा के तहत किए जाएंगे। इसकी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।
वासका प्रोजेक्ट के तहत ग्रामीण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण विभाग ने संयुक्त रूप से काम करेंगे। सभी विभाग अपने-अपने हिस्से के काम को अंजाम देंगे। विदित हो कि देश में जलवायु परिवर्तन और गिरते जा रहे भूगर्भ जल स्तर को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2019 में वासका प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। राजस्थान, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के जिलों में इस पर काम चल रहा है। अब उप्र में तेजी से काम शुरू कर दिया गया है।
ऐसे सुधरेगा जल स्तर, बदलेगी जलवायु
झांसी। वासका प्रोजेक्ट के तहत भूगर्भ जल स्तर सुधारने के लिए नालियों का निर्माण किया जाएगा। सोकपिट टैंक बनाए जाएंगे। तालाब का पानी तालाब में रोकने के इंतजाम किए जाएंगे। वाटर हार्वेस्टिंग की जाएगी। पेयजल पनघन योजना तैयार होगी। इसके अलावा खेत तालाबों का निर्माण होगा। वहीं, जलवायु परिवर्तन के सुधार के लिए ऊसर भूमि में कैनाल का निर्माण और जीर्णोद्धार किया जाएगा। कैनाल प्लांटेशन होगा। सिंचाई सोकपिट बनाया जाएगा। वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के इंतजाम होंगे। डैम बनाए जाएंगे। घास बोई जाएगी तथा प्लांटेशन होगा।
कनेरा नदी को भी किया शामिल
झांसी। वासका प्रोजेक्ट में बबीना की विलुप्त हो चुकी कनेरा नदी को भी शामिल किया गया है। ये नदी विलुप्त हो चुकी है। इसे पुनर्जीवित करने का काम हो रहा है। इस नदी के पुनर्जीवित होने से आसपास के इलाकों में पानी की कमी नहीं होगी। विदित हो कि बबीना क्षेत्र में साल भर जल संकट रहता है। यहां तमाम खेतों के लिए भी पानी का प्रबंध नहीं है। लेकिन, इस नदी के स्वरूप में आने से तमाम किसानों को जल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
2020 में भूगर्भ जल का स्तर (मीटर में)
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ब्लाक प्री मानसून पोस्ट मानसून
बबीना 8.37 4.62
बामौर 14.45 12.09
बंगरा 8.51 6.00
बड़ागांव 5.33 4.74
चिरगांव 7.32 6.46
गुरसराय 10.57 9.89
मऊरानीपुर 9.16 7.59
मोंठ 3.58 2.94
वासका प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में बबीना ब्लाक के ग्राम चमरौआ व मानपुरा का चयन किया गया है। योजना के तहत भूगर्भ जल के गिरते स्तर को ऊपर लाने के उपाय किए जाएंगे। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन की दशा संवारने पर भी काम होगा। योजना में कनेरा नदी को भी शामिल किया गया है।
- आरए सिंह, उपायुक्त मनरेगा