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वायलिन के सुर में, लोकगीत के बोल

Sun, 06 Nov 2016 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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cultural news - फोटो : demo
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शनिवार को श्री लक्ष्मी व्यायाम मंदिर के पवेलियन हॉल में पारंगत कलाकारों के साथ युवा कलाकारों ने भी संगीत सम्मेलन में अपनी प्रतिभा दिखाई। कलाकारों ने वायलिन की धुन पर छठ पर्व के लोकगीत सुनाई। वहीं, लेखराज एंड पार्टी ने कत्थक नृत्य कर रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित भावों को दर्शाया।
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प्रभु श्री रामलाल संगीत महाविद्यालय के  तत्वावधान में आयोजित 40 वां अखिल भारतीय योग, संगीत सम्मेलन में इलाहाबाद के संतोष नाहर ने राग चारू के शी, राग यमन राग विहाग पर धुने पेश कर कजरी व ठुमरी को प्रस्तुत किया। उन्होंने छट पर्व के उपलक्ष्य में वायलिन पर छट के भजन तथा लोकगीत भी धुनों द्वारा मधुर अंदाज में पेश किया। इंदौर के विनोद चांदोलकर ने मधुवंती में छोटा ख्याल व बड़ा ख्याल प्रस्तुत कर लोगों को बांधे रखा। दिल्ली के कलाकारों में लेखराज कोहली एंड पार्टी ने गणेश वंदना कर ओडिशी, कत्थक व भरतनाट्यम के संयुक्त नृत्य पर नमामि विघ्न राजन की प्रस्तुति दी। लखनऊ घराना की शैली में उन्होंने कत्थक को मोहक अंदाज में पेश किया। मुख्य आकर्षण का केंद्र महारानी लक्ष्मी बाई के  जीवन के भावों को प्रस्तुत करना रहा, इसमें मनु के युद्ध कौशल का प्रशिक्षण, विवाह दौरान वधू का, अंग्रेजों से युद्ध करने आदि की प्रस्तुति रही। रहा। इसके बाद लेखराज एवं उनके सहयोगी शशि आरोही, मौसमी, निक्की, सुरभि आदि ने दुर्गा स्तुति पर नृत्य को पेश किया। दिल्ली के फरदीन हुसैन ने तबले पर तीन ताल को सुनाया। सारंगी पर संगत शहनवाज ने दी। नितिन शर्मा ने भजन प्रस्तुत किया।
इससे पूर्व संगीत प्रतियोगिता के विजेताओं व सभी 277 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र व स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं, वरिष्ठ कलाकारों लोक नाथ व बलराम सिंह को शॉल व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य कृष्णकांत झा, डा. हरीमोहन गुप्ता, हरीराम वर्मा, ओमप्रकाश कोहली, गिरजा शंकर तिवारी, राम दास जैन, नीति शास्त्री, डा. बाबूलाल तिवारी, रामदास जैन आदि मौजूद रहे। संचालन बृजभूषण झा ने किया और आभार सह संयोजक दिनेश भार्गव ने जताया।
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उत्तर भारत में गिने चुने कलाकार
लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में आयोजित संगीत सम्मेलन में हिस्सा लेने आए बिहार सरकार से बिहार श्री अवार्ड व मुुंबई से सुरमणि अवार्ड पाए डा. संतोष नाहर ने अमर उजाला को बताया कि उत्तर भारत में वायलिन के गिने चुने ही कलाकार है। उनके अनुसार वायलिन सीखने के लिए युवा तो आगे बढ़ रहे है, लेकिन सीखाने वाले कम है।
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आज विप्लव ठोकेंगे ताल तबले पर
रविवार को संगीत सम्मेलन में झांसी की पूर्वी भालेराव शास्त्रीय संगीत, कोलकाता के विप्लव भट्टाचार्य तबला, दिल्ली के सरबरी बनर्जी शास्त्रीय गायन, वाराणसी के विजित सिंह सरोद और नितिन शर्मा व समीर भालेराव जुगलबंदी प्रस्तुत करेंगे। सह संयोजक दिनेश भार्गव ने बताया कि अंत में श्री प्रभु राम लाल संगीत महाविद्यालय की छात्राएं सामूहिक लोक नृत्य प्रस्तुत करेगी।
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