झांसी। राज्य सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव ने कहा कि तीस दिन के अंदर सूचना न देने वाले जन सूचना अधिकारी दंडित होंगे। सूचना के अधिकार कानून के बारे में समस्त विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को जागरूक करने के लिए राज्य सूचना आयोग द्वारा नए वर्ष के शुरूआती दौर में प्रदेश के सभी जिलों में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। वह बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में आयोजित जागरूकता कार्यशाला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि तीस दिन के अंदर अगर किसी को सूचना नहीं मिलती है तो यह गंभीर प्रकरण है। आवेदक द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग में कर सकता है। गैर गंभीरता व शिथिलता सिद्ध होने पर संबंधित पर 250 रुपये के हिसाब से दंड लगाया जाएगा। सर्विस बुक में भी प्रतिकूल प्रविष्टि मिलेगी।
विभागीय जांच भी होगी। उन्होंने बताया कि कोई आवेदन कर्ता राज्य सूचना आयोग द्वारा किए गए निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है। सूचना अधिकार अधिनियम ने कार्यालयों की गोपनीयता को ध्वस्त कर दिया है। विभागों में दस्तावेजों का रखरखाव ठीक न होने पर आरटीआई का जवाब देने में पग-पग पर समस्याएं आएंगी।
उन्होंने बताया कि आयोग में प्रतिदिन ढाई से तीन सौ मामले सुनवाई को आते हैं। द्वितीय सुनवाई के दौरान ऐसा पाया गया कि जन सूचना अधिकारी कार्यालय में दाखिल प्रार्थनापत्रों पर अक्सर सूचनाएं नहीं मिलती हैं। जन सूचना अधिकारी का दायित्व है कि वह मांगी गई सूचना उपलब्ध कराए।
जब भी जन सूचना अधिकारी, पीआईओ के समक्ष आवेदन आए तो वह नियमाें का ध्यान रखकर उसका परीक्षण करें। यदि पीआईओ को लगता है कि सूचनाएं दीर्घ और विस्तृत हैं तो दो रुपये प्रति पेज के हिसाब से शुल्क लेकर उसे सूचना दें। शुल्क की सूचना भी आवेदक को एक माह के भीतर ही देनी है, यह बात याद रहे।
कार्यशाला में सूचना आयुक्त से लोगों ने प्रश्न पूछकर जिज्ञासाओं को शांत किया। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने कहा कि आरटीआई से संबंधित सभी मामलों को विश्वविद्यालय स्तर पर निपटाने की समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं। ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने के समुचित प्रयास किए जा रहे हैं।