झांसी। यूपी बोर्ड हाईस्कूल-इंटरमीडिएट के परीक्षा परिणामों में अबकी झांसी शहर के स्कूलों का प्रदर्शन बेहद शर्मनाक रहा। यूं तो कई स्कूल अच्छे रिजल्ट का दम भर कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं लेकिन रैंकिंग के नाम पर वर्ष 2018 में 10वीं में तीसरे और 12वीं 20वें पायदान पर रहा झांसी इस साल 10वीं में 54वें और 12वीं में 72वें नंबर पर पहुंच गया है। पांच सालों में यहां पढ़ाई का स्तर कितना गिर गया, ये बोर्ड द्वारा जारी की गई जिले की ओवरऑल रैंकिंग से साफ पता चल रहा। वहीं, शिक्षक इसके पीछे कोराना काल को जिम्मेदार बता रहे हैं लेकिन कोरोना तो पूरी दुनिया में फैला था, झांसी के ही परीक्षा परिणाम इतने खराब क्यों रहे इसका जवाब फिलहाल मोटा-मोटा वेतन ले रहे मास्टर जी के पास भी नहीं है।
तमाम विभागीय योजनाओं के नाम पर हाईस्कूल-इंटरमीडिएट में छात्रों की पढ़ाई पर लाखों-करोड़ों खर्च होने के बाद भी यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणामों में झांसी फिसड्डी साबित हुआ। जनपद के स्कूलों में एक हजार से अधिक शिक्षक हर महीने मोटी फीस लेने के बाद अच्छा परीक्षा परिणाम नहीं दे पाए। प्रदेश में जिलेवार जारी हुई रैंकिंग सूची में 10वीं में 54वीं और इंटरमीडिएट 72वीं रैंक से स्कूलों की पढ़ाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि हर दूसरा-तीसरा स्कूल अपने परीक्षा परिणामों को बेहतरीन बता कर मिठाई बांट रहा। लेकिन प्रदेश तो छोड़िए, जिले की सूची में भी शहर के तमाम स्कूल पीछे रहे। देहात क्षेत्र में गुरसराय और मऊरानीपुर के कुछ स्कूलों ने अच्छे परिणाम दिए। ललितपुर में महरौनी के दो स्कूलों ने तो प्रदेश की टॉप-10 लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। फिर बाकी स्कूलों के बच्चे अच्छा प्रदर्शन क्यों नहीं कर पाए...? इसका ठीकरा सिर्फ कोरोना पर फोड़ा जा रहा है।
कोरोना काल के बाद स्कूल खुले...पर पढ़ाई-लिखाई पर नहीं दिया ध्यान
झांसी। इस बार हाईस्कूल में 22095 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी। परीक्षा परिणाम 86.46 फीसदी रहा। बाकी बच्चे लटक गए। इंटरमीडिएट में 21505 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी। जबकि रिजल्ट 76.00 फीसदी रहा।
ऐसे में जनपद के स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। कोरोना काल में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई, उसको स्कूल खुलने के बावजूद ठीक नहीं किया जा सका। उधर, ललितपुर 10वीं में 75वें और 12वीं में 50वें नंबर पर रहा है।
सरकारी स्कूल कई वर्षों से फिसड्डी साबित
झांसी। शहर के सरकारी स्कूल कई वर्षों से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। पिछले वर्षों में भी इन स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने प्रदेश की मेरिट लिस्ट में कोई खासा स्थान नहीं पाया। वर्ष 2018 में इंटर में भानी देवी गोयल सरस्वती विद्या मंदिर के छात्र अभय अग्रवाल प्रदेश में छठवें स्थान पर थे। सरकारी स्कूलों में मोटा-मोटा वेतन ले रहे शिक्षक भी रिजल्ट को लेकर कोई मंथन नहीं कर रहे।
ये बोले प्रधानाचार्य
शिक्षकों को गाइडलाइन नहीं मिल पाई। कोरोना काल में छात्र-छात्राओं को स्कूल का वातावरण नहीं मिला। इससे पढ़ाई में दिक्कत हुई, बच्चे परीक्षाओं पर भी फोकस नहीं कर पाए।
-अर्चना अवस्थी, प्रधानाचार्य, सरस्वती इंटर कॉलेज, सदर
जो बच्चे पहले से कमजोर रहे होंगे, वो कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाए। घर पर पढ़ाई का माहौल भी नहीं मिल सका। इससे रिजल्ट पर असर पड़ा।
-सुमन श्रीवास्तव, आर्य कन्या इंटर कॉलेज, सीपरी बाजार
कोरोना से पहले स्कूलों में लगातार कक्षाएं चलीं, कोरोना के बाद एकदम से बच्चे घर बैठ गए। सरकारी स्कूलों में कई बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पाए। परीक्षा में कई बच्चों को लिखने में समस्या आई।
-पीके मौर्या, प्रधानाचार्य, जीआईसी
कोरोना काल के दौरान जो पढ़ाई-लिखाई बाधित हुई, स्कूल खुलने के बाद विद्यालयों को इस पर फोकस करना चाहिए था। बोर्ड के बच्चों को सख्ती से परीक्षा की तैयारी कराना जरूरी था। हालांकि कई स्कूलों ने अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन ओवरऑल रैंकिंग अच्छी नहीं हो पाई। अब इस पर फोकस किया जाएगा। विद्यालयों पर सख्ती बरती जाएगी।
कोमल यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक