उपभोक्ता अदालत ने दिए आदेश, दो माह के भीतर क्षतिपूर्ति की राशि न देने पर सात प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज देनी होगी
प्वाइंटर
किसान की लापरवाही के अधिकारियों के तर्क को अदालत ने नहीं माना
आठ साल बाद न्याय मिलने पर किसान की पत्नी ने ली राहत की सांस
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। करंट से किसान की मौत के मामले में उपभोक्ता अदालत ने बिजली निगम को 13 लाख 10 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति किसान की विधवा को देने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय में भुगतान न करने पर सात प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज भी देना होगा। आठ साल बाद न्याय मिलने पर आर्थिक संकट से जूझ रही किसान की पत्नी ने राहत की सांस ली है।
जिले के गांव कचीर निवासी कन्हैया लाल 21 जून 2016 को गोटी राम यादव के खेत पर गोबर की खाद डालने के लिए गया था। इसी दौरान खेत के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की लाइन के करंट से कन्हैया लाल की मौत हो गई। इस मामले में खेत मालिक गोटी राम ने थाना ककरवई में रिपोर्ट दर्ज कराई। किसान की पत्नी प्रभा ने बिजली निगम के अधिकारियों को इस मामले में जानकारी देकर मुआवजे की मांग की, लेकिन निगम ने कोई सुनवाई नहीं की। अधिवक्ता गणेश कुमार खरे ने बताया कि यह मामला 14 मार्च 2018 को जब उपभोक्ता अदालत में पहुंचा तो निगम के अधिकारियों ने तर्क रखा कि किसान की लापरवाही से ही उसकी मौत हुई है। किसान की पत्नी ने अपना पक्ष रखा कि पति की मौत के बाद उसके पास कमाई का कोई साधन नहीं है। साथ ही उसकी साढ़े पांच साल और दो साल की दो बेटियां हैं। परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। दोनों पक्षों को सुनने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अध्ययन के बाद न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष अमर पाल सिंह, सदस्य देवेश अग्निहोत्री व ज्योति प्रभा जैन ने किसान की पत्नी प्रभा की बात को सही माना और 28 मार्च को उसके पक्ष में निर्णय सुनाया। अदालत ने अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड ग्रामीण दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को दो माह के भीतर किसान की पत्नी को 13 लाख 10 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए हैं।