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Jhansi News: बुंदेलखंड में युवाओं पर चढ़ा ऑनलाइन गेमिंग का नशा, गवां रहे जान

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। बुंदेलखंड में ऑनलाइन गेमिंग की लत युवाओं को तेजी से अपना शिकार बना रही है। यह शौक अब उनके मौत की वजह बनता जा रहा है। हाल के कुछ माह के भीतर ऐसी कई घटनाएं सामने आ गईं, जिसमें ऑनलाइन गेम में पैसा गंवाने के बाद मानसिक दबाव में आकर उन्होंने अपनी जान दे दी। जान गंवाने वालों में तकरीबन सभी युवा हैं।



मोबाइल में ऑनलाइन गेम इंस्टाल करने वाले युवाओं का कहना है उन्होंने सिर्फ मनोरंजन के लिए इसे अपने फोन में डाउनलोड किया था। कुछ दिन खेलने के बाद थोड़े-थोड़े पैसे लगाने लगे। शुरूआत में पैसा जीतने पर अच्छा लगा। इसके बाद कई गेम हार गए। जितने के लिए रोजाना खेलने लगे। अब यह लत जैसी हो गई। समय निकालकर रोजाना गेम खेलते हैं। किसी की टोकाटाकी पसंद नहीं आती। इससे घर में कलह होने लगी।
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साइबर विशेषज्ञों का कहना है जान देने वालों में अधिकांश युवा (19-22 साल) या नाबालिग थे। इनमें अधिकांश मध्यम या निम्न-मध्यम वर्ग से जुड़े थे, गेमिंग में पैसा हारने के बाद कर्ज में डूब गए। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि पुलिस भी इसको लेकर लगातार लोगों को जागरूक करने का काम कर रही है। अभिभावकों को भी इस पर निगाह रखने की जरूरत है।

ऑनलाइन गेमिंग को युवा आसान कमाई का जरिया समझते हैं, लेकिन हकीकत में यह उन्हें बर्बाद कर रहा है। सरकार को इसे सख्ती से नियंत्रित करना चाहिए। - आभा श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता

ऑनलाइन गेमिंग से समय रहते सतर्क होने की आवश्यकता है। यह एक मानसिक विकार हो सकता है। अब इसे गेमिंग डिसऑर्डर के तौर पर भी पहचाना जाता है। बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में जागरुकता की कमी ने इसे अधिक खतरनाक बना दिया है। - डॉ. जीडी शिवहरे, मनोवैज्ञानिक

लत से बचाव के तरीके



- ऑनलाइन गेमिंग से दूर रहने की कोशिश करें।

- गेमिंग के लिए एक निश्चित समय तय करें, यह दिन में आधे घंटे से अधिक न हो।



- डिवाइस पर स्क्रीन टाइम ट्रैकिंग एप का इस्तेमाल करें। जरूरत पड़ने पर सीमा तय करें।

- सामाजिक गतिविधियों में अधिक ध्यान लगाएं। खाली समय में उनसे बात करने को तरजीह दें।



- गेमिंग के ट्रिगर्स को पहचनाने की कोशिश करें। गेमिंग से जुड़े सोशल मीडिया के ग्रुप से दूरी बनाएं

केस एक



टहरौली के तेंदुआ गांव निवासी फूल सिंह (22) ने गेमिंग एप में खेलने के लिए ऑनलाइन लोन लिया था। इस लोन की किस्त वह चुका नहीं पा रहा था। आखिरकार परेशान होकर उसने जहर निगलकर अपनी जान दे दी।

केस दो

ललितपुर के तालबेहट थाना क्षेत्र के राधापुर गांव निवासी रामनिवास (19) भी ऑनलाइन गेमिंग का शिकार था। परिजन ने उसे किराने की दुकान चलाने के लिए पैसा दिया था लेकिन, वह 20 हजार रुपये हार गया। हार और आर्थिक तनाव के चलते वह परेशान रहने लगा। 11 मार्च को उसने आत्महत्या कर ली।

केस तीन

हमीरपुर में एक नाबालिग लड़के ने ऑनलाइन गेमिंग की लत के चलते आत्महत्या कर ली। परिजन का कहना था कि ऑनलाइन गेम खेलने के लिए पैसे जुटाने के लिए उसने घर से चोरी की थी। काफी पैसा उस पर कर्ज भी हो गया। कर्ज एवं तनाव में घिर जाने से उसने जान दे दी।
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केस चार



शहर निवासी युवा कपड़ा कारोबारी भी ऑनलाइन गेमिंग के चलते कई लाख रुपये के कर्जदार हो गए थे। कर्ज की वजह से उनकी दुकान भी बंद हो गई। पिछले महीने उन्होंने घर के पास स्थित गेस्ट हाउस में जाकर आत्महत्या कर ली।
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