लोगों को सैनिटाइजर की खरीदारी करते समय नकली और असली का विषेश ध्यान देने की जरूरत है। केंद्र और राज्य सरकार ने सिर्फ आइसोप्रोफाइल एल्कोहल या एथेनॉल युक्त सैनिटाइजर को ही मंजूरी दी है।
ऐसे में लोग इनके मिश्रण वाले सैनिटाइजर का ही इस्तेमाल करें। वहीं, कई कंपनियां प्रोपेनॉल समेत दूसरी तरह की चीजें डालकर सैनिटाइजर बना रही हैं। इसके अलावा कुछ में एल्कोहल का प्रतिशत कम है। ये सब सैनिटाइजर बेअसर हैं।
इसलिए कभी भी सैनिटाइजर की बोतल खरीदने से पहले उसपर लिखे पदार्थों के मिश्रण की जानकारी को अच्छे से पढ़ लें।
मेथेनॉल वाला हैंड सैनिटाइजर इसलिए खतरनाक
स्वास्थ्य एजेंसियों के मुताबिक मेथेनॉल एल्कोहल का एक ऐसा रूप है, जो बहुत जहरीला होता है। मेथेनॉल का इस्तेमाल आमतौर पर रेसिंग गाड़ियों के ईंधन में और एंटीफ्रीज के तौर पर किया जाता है।
मेथेनॉल इतना खतरनाक हो सकता है कि इसे त्वचा पर लगाने से यह सीधे स्किन के अंदर चला जाता है और गंभीर मामलों में जानलेवा भी हो सकता है। मेथेनॉल युक्त सैनिटाइजर को हाथों पर लगाने से जहरीला प्रभाव फैल सकता है। यहां तक कि ऐसा एल्कोहल युक्त सैनिटाइजर सूंघना भी खतरनाक हो सकता है।