महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जूनियर रेजीडेंटों (जेआर) की जिम्मेदारी बढ़ाते हुए कई निर्देश जारी किए हैं। अब मरीज के इमरजेंसी आने पर जूनियर डॉक्टर उसका ओपीडी पर्चा बनवाएंगे। पर्चे पर बीमारी का पूरा विवरण एवं मरीज का परीक्षण लिखेंगे। इसके बाद ही उपचार शुरू करेंगे। जरूरत पड़ने पर मरीज को भर्ती करेंगे।
इमरजेंसी में आए मरीजों को यदि आईवी फ्लूड, आईवी एंटीबायोटिक्स या अन्य दवाओं की जरूरत पड़ती है, तो ऐसे मरीजों का उपचार सिर्फ भर्ती करने के बाद ही किया जाएगा। मरीज की जांच भी भर्ती के बाद ही कराई जाएगी। सभी जूनियर रेजीडेंटों के फोन 24 घंटे में किसी भी समय न तो साइलेंट मोड पर रहेंगे, न ही स्विच ऑफ। अवकाश लेने से पहले जूनियर चिकित्सक पत्र अपने सीनियर से प्रेषित कराएंगे।
अपनी यूनिट के वरिष्ठ डॉक्टर के हस्ताक्षर करवाकर विभागाध्यक्ष की अनुमति के बाद ही अवकाश पर जाएंगे। यदि कोई जूनियर रेजीडेंट मरीज अथवा मरीज के तीमारदारों से अभद्रता करता पाया जाता है, तो उस पर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सभी जूनियर डॉक्टर ड्यूटी के दौरान नेम प्लेट सहित एप्रेन पहनकर रहेंगे। इनमें से किसी भी निर्देश का पालन नहीं करने वाले जेआर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।