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Jhansi News: प्रतिस्पर्धा नहीं समन्वय से कार्य करें, तो मिलेगी सर्वोत्तम चिकित्सा

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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। प्रतिस्पर्धा की बजाय आयुर्वेद व आधुनिक चिकित्सा में समन्वय से कार्य करें, तो सर्वोत्तम चिकित्सा मिलेगी। चिकित्सा क्षेत्र से एआई का जुड़ाव क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। यह बात पैरामेडिकल कॉलेज में को ‘ए कॉन्फ्लुएंस ऑफ मॉर्डन एंड ट्रेडिशनल मेडिसिन विद टैक्निकल साइंस’ विषय पर हुए सेमिनार में वक्ताओं ने कही।
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पैरामेडिकल कॉलेज के निदेशक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. अंशुल जैन ने कहा आज सभी विद्या प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा जो छात्र लक्ष्य आधारित अनुसंधान करना चाहेंगे, उनके लिए इंटर-इंस्टिट्यूशनल टीमें गठित की जाएंगी। उन्हें मार्गदर्शन एवं संसाधन प्रदान किए जाएंगे।मुख्य अतिथि रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह ने कहा कि हमारा वर्तमान और भविष्य ‘वन हेल्थ’ पर आधारित है। इसमें न केवल मानव स्वास्थ्य बल्कि पशु और पौधों का स्वास्थ्य भी सम्मिलित है। उन्होंने मिलेट्स (श्रीअन्न) पर चल रहे अनुसंधान भी साझा किए। अभाविप के संगठन मंत्री घनश्याम शाही ने कहा कि देश पारंपरिक चिकित्सा की अच्छाइयों को आत्मसात करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की दिशा में अग्रसर है। बीआईईटी निदेशक डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में स्वास्थ्य पर केंद्रित कार्यों की संभावना बढ़ रही है। यह मंच डॉक्टरों और इंजीनियरों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करेगा। बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकृष्ण राठौर ने कहा आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली प्रतिस्पर्धा की बजाय समन्वय के साथ कार्य करें, तो सर्वोत्तम चिकित्सा समाधान प्राप्त किए जा सकते हैं। तकनीकी सत्र में मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जकी सिद्दीकी ने कहा स्मार्ट इंसुलिन पर शोध अंतिम चरण में हैं। इसमें जरूरत होने पर ही शरीर में इंसुलिन रिलीज होगी। तर्क देते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र से एआई का सटीक जुड़ाव क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आएगा। आयुर्वेद कॉलेज के डॉ. विशाल कोडेसिया, कृषि विवि के डॉ. प्रशांत जांभुलकर, बीयू के डॉ. धीरेंद्र शर्मा, पैरा मेडिकल के डॉ. गौरव सक्सेना, डॉ. पारस गुप्ता ने शुगर के उपचार को लेकर हुए शोधों पर चर्चा की। अंत में डॉ. पंकज सोनकिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसमें पारंपरिक चिकित्सा, आधुनिक चिकित्सा, कृषि एवं तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े करीब 500 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
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