फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेल मंत्री नहीं माने तो छोड़नी होगी ‘नेतागीरी’

Tue, 21 Mar 2017 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
झांसी रेल मंडल - फोटो : demo
विज्ञापन
रेलवे बोर्ड द्वारा सेफ्टी (संरक्षा) से जुड़े सुपरवाइजरों को 31 मार्च के बाद ट्रेड यूूनियन में हिस्सा नहीं लेने के निर्देश दिए जाने के खिलाफ रेलवे की मान्यता प्राप्त यूनियनें आंदोलनरत हैं। इस मुद्दे को लेकर मंगलवार को फेडरेशन के नेताओं की रेलमंत्री से बात होनी है। अगर दस दिन में यह आदेश रद नहीं हुआ तो झांसी रेल मंडल में ही 112 सुपरवाइजरों को यूनियन छोड़नी पड़ेगी।  
विज्ञापन

रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि 31 मार्च के बाद सेफ्टी से जुड़े विभागों के सुपरवाइजर स्तर के कर्मचारी यूनियन में हिस्सा नहीं ले सकेेंगे। बोर्ड का मानना है कि रेल संरक्षा से जुड़े स्टेशन मास्टर, रेल पथ निरीक्षक, लोको इंस्पेक्टर के अलावा सिगनल और दूरसंचार, टीआरडी, सीएंडडब्लू विभागों के सुपरवाइजरों के यूनियन में शिरकत  करने से काम प्रभावित होता है। रेल संरक्षा के हिसाब से यह ठीक नहीं है। इस आदेश के बाद से भारतीय रेल की सभी मान्यता प्राप्त यूनियनें लगातार आंदोलन चला रही हैं।
 झांसी रेल मंडल में भी नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन और नॉर्थ सेंट्रल इंप्लाइज संघ का विरोध प्रदर्शन जारी है। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन 23 मार्च को झांसी में जुलूस और 30 मार्च को मुख्यालय इलाहाबाद पर प्रदर्शन करने जा रही है। इसी तरह नार्थ सेंट्रल इंप्लाइज संघ 27 मार्च को डीआरएम कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करेगा। यूनियन नेता इस आदेश को रेल कर्मचारियों के मौलिक अधिकार का हनन बता रहे हैं।  
विज्ञापन


‘फेडरेशन के नेताओं की 21 व 22 मार्च को रेल मंत्री के साथ इस मुद्दे को लेकर बैठक है। अगर यह आदेश रद नहीं होता है तो 31 मार्च के बाद यूनियनें उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाएंगी।’
विज्ञापन

आरएन यादव, मंडल सचिव नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें