झांसी। बुंदेलखंड के लोक कलाकारों का दर्द भी गहराया हुआ है। आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे कलाकारों का कहना है कि अगर उन्हें काम नहीं दिया जा सकता है, तो कम से कम इच्छा मृत्यु का ही अधिकार दे दें। ताकि ऐसी कठिन परिस्थितियों से बच सके और दर - दर तो नहीं भटकना पडे़।
बुंदेलखंड में लोक कला संस्कृति क ी कभी अहम भूमिका होती थी। देश - प्रदेश के लगभग हर छोटे - बडे़ महोत्सव में बुंदेली कलाकारों को कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए भेजा जाता था। साथ ही, विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत कार्यक्रम भी प्राप्त हो जाते थे। लेकिन क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र के सक्रिय न होनेे और कोविड - 19 के कारण बुंदेली विद्याओं के कलाकार बेरोजगार हो गए है। गुरसराय के श्याम जादूगर ने कहा कि उन्होंने इच्छा मृत्यु के लिए प्रशासन को पत्र लिखा था। उनकी मांग थी, कि उन्हें काम दिया जाए। लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।
आज अधिकांश कलाकार भुखमरी की कगार पर हैं। कोविड 19 के कारण कलाकारों की दशा दुर्दशा में बदल गईं। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश कलाकारों का पेट कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने पर प्राप्त होने वाली आय से भरता है। लेकिन एक लंबे समय से यह सब प्रभावित हैं। अगर समस्या नहीं, सुलझी, तो हम सभी कलाकार अपनी मांगों को लेकर फिर मंडल मुख्यालय में जाएंगे। इधर बुंदेली लोक कलाकार लाड़ कुंवर ने कहा कि बुंदेली लोक कलाकारों की हर संभव मदद की जाए।
बुंदेली कलाकारों को पेंशन के लिए वह प्रयास कर रहे हैं। सूचना विभाग से कलाकार फार्म लेकर अपना पंजीयन करा सकते हैं। कलाकारों की समस्याओं को वह मुख्यमंत्री को अवगत करा चुके हैं।
डॉ. धन्नू लाल गौतम, उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी
बुंदेलखंड में लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम किये जाएंगे। इसमें लोकल कलाकारों की प्रतिभागिता रहेगी व उन्हें आर्थिक प्रोत्साहन भी प्राप्त होगा।
जवाहर लाल राजपूत, विधायक गरौठा
बुंदेली कलाकारों के प्रमोशन के लिए आकाशवाणी और संस्कृति विभाग है। कोविड - 19 के कारण सभी कुछ प्रभावित रहा है। कलाकारों को हर संभव मदद की जाएगी।
रवि शर्मा, नगर विधायक