ईद उल अजहा आज, तैयारी पूरी
झांसी। सुन्नते इब्राहिमी की अदायगी का त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरा ईद) आज मनाया जाएगा। इसको लेकर मुस्लिम समाज के लोग तैयारियों में जुटे रहे। देर रात तक बकरा मंडी में लोग बकरों की खरीदारी करते नजर आए। बाजारों में भी देर रात तक रौनक रही। सुबह नमाजे ईद की अदायगी के साथ ही तीन दिन तक चलने वाले कुर्बानी के सिलसिले का भी आगाज होगा।
ईद-उल-अजहा का त्योहार इस्लामी साल के आखिरी महीने जिल हिज्जा की दस तारीख को मनाया जाता है। सोमवार को शहर में ईद उल अजहा मनाया जाएगा। इसको लेकर ईदगाह से लेकर शहर की मस्जिदों में साफ-सफाई की जाती रही। घरों में भी लोग तैयारियाें में जुटे रहे।
इस दिन कुर्बानी करने का विशेष महत्व होने के कारण देर रात तक शहर की बकरा मंडी के अलावा अन्य जगहों पर लोग बकरों की खरीदारी करते नजर आए। मानिक चौक, सीपरी बाजार, सदर बाजार के अलावा शहर के मुख्य बाजारों में महिलाओं, बच्चों की भी भीड़ रही।
कुर्बानी का मकसद
मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया कि कुर्बानी का मकसद जानवर को राहे खुदा में कुर्बान कर देना भर नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं को अल्लाह के हुक्म पर निसार कर देना है। जैसा पैगंबर पिता ने अपने पैगंबर बेटे के लिए किया था। हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने हुक्म ए खुदा पर अपने बेटे हजरत इस्माइल को राहे खुदा में कुर्बान कर देने का फैसला किया था। वह अपने इम्तिहान में कामयाब हुए। उनकी ये अदा अल्लाह को काफी पसंद आई। अल्लाह ने कई निश्चित हैसियत वाले मुसलिमों के लिए कुर्बानी को जरूरी करार दिया। अल्लाह की राह में कुर्बानी देकर दरअसल इंसान अपने जज्बात की कुर्बानी पेश करता है। ईद-उल-अजहा पर होने वाली विशेष नमाज की अदायगी के बाद कुर्बानी करने का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा, जो बकरीद से लेकर तीन दिन तक जारी रहेगा।