झांसी। सीपरी बाजार के मिशन कंपाउंड से गायब हुए तीनों बच्चे हीरो बनने की चाहत लेकर मुंबई गए थे। मुंबई जाने की योजना पांच दिन पहले स्कूल में बनाई थी। यह खुलासा रविवार को मुंबई से आने के बाद तीनों बच्चों ने किया है।
उल्लेखनीय है कि 30 दिसंबर की शाम को सीपरी बाजार के मिशन गेट निवासी सैन्य कर्मी बसंत राज का पुत्र पृथ्वीराज उर्फ प्रेम (10), ग्वाल टोली निवासी राजेंद्र गुप्ता का पुत्र मयंक गुप्ता (14) और कोतवाली के पठौरिया निवासी महेंद्र मिश्रा का पुत्र अभिषेक मिश्रा (15) गायब हो गए थे। इससे हड़कंप मच गया गया था।
एक जनवरी को उस समय राहत मिली जब मयंक ने अपने पिता को फोन पर मुंबई के अंधेरी इलाके में होने की सूचना दी। एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे की प्रेसवार्ता में मयंक गुप्ता व अभिषेक मिश्रा ने संयुक्त रूप से बताया कि मुंबई घूमने और फिल्मी दुनिया में कैरियर बनाने की योजना 26 दिसंबर को स्कूल में बनी थी।
इसमें कार्तिक निरंजन व हर्ष पाखरे भी शामिल थे। जब चुपचाप मुंबई चलने की बात हुई तो हर्ष पाखरे ने परीक्षा के बाद माता-पिता के संग जाने की बात कहकर इनकार कर दिया। मयंक ने प्रेम से बात की तो वह हीरो बनने के लिए मुंबई जाने को तैयार हो गया। 30 दिसंबर की शाम को मयंक व अभिषेक जब कार्तिक निरंजन को लेने आशिक चौराहा पहुंचे तो उसने इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों प्रेम के पास आए और चुपचाप निकल गए।
तीनों ने बताया कि वह सीधे स्टेशन पहुंचे, जहां से पुणे-लखनऊ ट्रेेन से भोपाल पहुंचे। भोपाल से रात को ट्रेन पकड़कर रात्रि 2.20 बजे इंदौर पहुंचे। इंदौर से मालेगांव के लिए बस में सवार हुए, जिसने करीब 150 किमी. पहले उतार दिया। इसके बाद ट्रक में सवार होकर मुंबई पहुंचे। ट्रक चालक मयंक के एक परिचित का दोस्त निकल आया, जिसने उन्हें घूमने के लिए 100 रुपये भी दिए। उन्होंने बताया कि मुंबई के अंधेरी पहुंचने पर मयंक ने पिता को फोन किया।
फिर तीनों जूहू व चौपाटी घूमने चले गए। इस बीच मयंक के रिश्तेदार उन्हें अपने साथ ले गए, जहां से पुलिस उन्हें लेकर झांसी आ गई। एसएसपी के आदेश पर सीपरी बाजार थाना पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराकर तीनों बच्चे परिजनों को सौंप दिए।
इंसेट
मुंबई के सिपाही को दिया चकमा
तीनों बच्चों ने बताया कि वह चौपाटी पर मौज मस्ती कर रहे थे। वहां पर एक सिपाही उनको मिला। उनके टोकने पर सिपाही ने कहा कि वह झांसी के तीन बच्चों को तलाश रहा है, तो मयंक ने हंसते हुए कहा कि मिल जाए तो हमें भी बता देना।
रास्ते में टीटी को भी झांसा दिया
झांसी से इंदौर जाते समय ट्रेन में टीटी ने तीनों से टिकट मांगा तो उन्होंने जल्दबाजी में टिकट नहीं खरीदने की बात कह दी। भोपाल से इंदौर जाते समय रिजर्वेशन कोच में टीटी ने टोका तो वह स्टेशन पर उतरकर दूसरे कोच में बैठ गए।
तीनों के पास थे सिर्फ एक हजार रुपये
मयंक और अभिषेक ने बताया कि वह तीन-तीन सौ रुपये लेकर मुंबई के लिए निकले थे। मयंक के एटीएम में चार सौ रुपये थे। रास्ते में ट्रक चालक ने 100 रुपये और दे दिए। मुंबई से फोन करने पर पिता ने एटीएम में एक हजार रुपये जमा करवा दिए। जब वह लौटकर आए तो उनके पास 1200 रुपये थे।
परिजनों पर हो सकती है कार्रवाई
एसएसपी ने बताया कि पुलिस पर झूठे आरोप लगाकर अनुचित दबाव बनाने और बच्चों के मुंबई जाने की जानकारी होने के बाद भी पुलिस को गुमराह किया गया। उन्होंने बताया कि इस मसले को लेकर मयंक व अभिषेक के परिजनों के खिलाफ जांच कराई जा रही है। दोषी पाए जाने पर उन पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।